भारत और नेपाल धर्म तथा संस्कृति के मामले में एक दूसरे के पूरक हैं। भारत के लोग भगवान पशुपति नाथ के दर्शन को लालायित रहते हैं तो वहीं नेपाल के लोग भारत की चार धाम यात्रा कर खुद को धन्य समझते हैं। भारत का संविधान कभी भी धर्म, जाति तथा लिंग के माध्यम से समाज को तोड़ता नहीं है बल्कि जोड़ता है।
यह बातें शुक्रवार शाम देवीपाटन शक्तिपीठ तुलसीपुर के ब्रह्मलीन महंत महेंद्र नाथ योगी की 21वीं पुण्य तिथि पर बलरामपुर के तुलसीपुर में संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कही।
उन्होंने कहा कि संत का अर्थ केवल पूजा और उपासना करना नहीं है बल्कि एक सच्चा संत या ऋषि समाज को सही दिशा दिखाने का काम करता है। लोक कल्याण ही संतों का प्रमुख धर्म है। ब्रह्मलीन महंत महेंद्र नाथ योगी ने भी इसी परंपरा का निर्वहन तराई की इस धरती पर किया था।
उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल धर्म तथा संस्कृति के मामले में एक-दूसरे के पूरक हैं। नेपाल में स्थित भगवान पशुपति नाथ के दर्शन कर भारत का हिन्दू खुद को धन्य समझता है तो नेपाल के हिंदू भारत की चार धाम यात्रा कर मोक्ष प्राप्ति की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि नाथ संप्रदाय ने सदियों से महिला शिक्षा के साथ-साथ हर धर्म व जाति के लोगों को शिक्षा दिलाने का प्रयास किया है।