सपा-बसपा गठबंधन का मुख्य फोकस अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े, अल्पसंख्यक, महिलाओं और युवाओं पर है। भाजपा ने भी इन्हें जोड़ने के लिए काफी काम किया है।
भाजपा ने जातिवार 23 सामाजिक सम्मेलन किए हैं। अनुसूचित जाति के सम्मेलन भी हुए हैं। भाजपा ने पिछड़ों व दलितों में अच्छी घुसपैठ की है। उसकी कोशिश होगी कि वह गठबंधन के प्रभाव को सीमित रखे।
सपा व बसपा का संगठनात्मक ढांचा मजबूत है, लेकिन भाजपा ने इस पर बहुत कसरत की है। 25 साल पहले की तुलना में आज की भाजपा में बड़ा बदलाव है। भाजपा ने सोशल इंजीनियरिंग व बूथ मैनेजमेंट पर काफी काम किया है।
मुस्लिम मतों के लिए इस बार सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस में मारामारी रहने की संभावना है। तीन राज्यों में चुनाव जीतने के बाद मुस्लिमों का रुझान कांग्रेस की तरफ हुआ है। ऐसी स्थिति में मुस्लिम मतों का रुझान काफी हद तक गठबंधन को प्रभावित करेंगे।