लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की इमरजेंसी के वायरल फोटो की प्राथमिक जांच में निजी अस्पताल से गठजोड़ की परतें उखड़ने लगी हैं। संस्थान की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इमरजेंसी में निजी अस्पताल का एजेंट सिर्फ बैठा ही नहीं था, बल्कि उसने एक मरीज भी शिफ्ट कराया था। इसके बाद निजी अस्पताल में मरीज की मौत भी हो गई थी। हालांकि, निजी अस्पताल के एजेंट ने सफाई दी है कि वह अपने मरीज को भर्ती कराने आया था। इलाज न मिलने पर अपने निजी अस्पताल ले गया था, जहां उसकी मौत हो गई।
मामले में लोहिया संस्थान ने जांच कमेटी बनाई है। जांच में यह सामने आया है कि रेजीडेंट डॉक्टर के बगल बैठा युवक आतिफ है जो जोबियल अस्पताल का एजेंट है। उस पर मरीजों की शिफ्टिंग का आरोप है। लोहिया संस्थान के सीएमएस डॉ. राजन के मुताबिक, जांच कमेटी बन गई है। मामले में दोषी मिलने पर किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा।
वहीं, जोबियल अस्पताल के पीआरओ आतिफ का कहना है कि वायरल फोटो में वह रेजीडेंट के बगल में बैठा है, लेकिन वह अपने मरीज को भर्ती कराने आया था। भर्ती न होने पर अपने अस्पताल ले गया, जहां उसकी मौत हो गई। उसने इमरजेंसी से मरीजों को शिफ्ट कराए जाने के आरोप को गलत बताया है।
खंगाली जाएगी एक माह की फुटेज
मामले में संस्थान प्रशासन ने एक माह की सीसीटीवी फुटेज खंगालने की बात कही है। इससे साफ हो सकेगा कि निजी अस्पताल का एजेंट कितने दिनों से यहां आ रहा था। साथ ही रात के वक्त यहां मंडराने वाले अन्य दलालों की जानकारी भी मिलेगी। संस्थान प्रशासन का कहना है कि जांच में रेजीडेंट दोषी मिला तो उसे बाहर किया जाएगा।