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लखनऊ में बनेगी ब्रह्मोस मिसाइल: प्रोडक्शन सेंटर के लिए आवंटित होगी 200 एकड़ जमीन, 15 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार

Tue, 24 Aug 2021 10:22 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने यूपीडा के सीईओ अवनीश अवस्थी के साथ हुई बातचीत में बताया कि लखनऊ नोड में ब्रह्मोस प्रोडक्शन सेंटर की स्थापना के लिए 300 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
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ब्रह्मोस मिसाइल (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लखनऊ नोड में ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण किया जाएगा। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ सुधीर कुमार मिश्र और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच मंगलवार को हुई मुलाकात में डिफेंस कॉरिडोर के लखनऊ नोड में ब्रह्मोस प्रोडक्शन सेंटर स्थापित करने के लिए 200 एकड़ जमीन आवंटित करने पर सहमति बनी। ब्रह्मोस मिसाइल का उत्पादन शुरू होने के बाद यूपी रक्षा उत्पाद निर्माण का हब बनने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ेगा। ब्रह्मोस एयरोसपेस के सीईओ ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना से भी मुलाकात की।

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ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने यूपीडा के सीईओ अवनीश अवस्थी के साथ हुई बातचीत में बताया कि लखनऊ नोड में ब्रह्मोस प्रोडक्शन सेंटर की स्थापना के लिए 300 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। ब्रह्मोस प्रोडक्शन सेंटर बनाने का कार्य जल्दी ही शुरू होगा। इन सेंटर में रिसर्च और डेवलपमेंट का कार्य भी होगा। 100 से अधिक ब्रह्मोस मिसाइल अगले तीन वर्षों में बनाए जाने की योजना है। ब्रह्मोस प्रोडक्शन सेंटर में उसमें करीब पांच सौ इंजीनियर तथा टेक्नीकल लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा। इसके अलावा करीब पांच हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा और 10 हजार लोगों को इस प्रोडक्शन सेंटर से काम मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि ब्रह्मोस प्रोडक्शन सेंटर के चलते अब यूपी डिफेंस कॉरिडोर में डिफेंस सेक्टर में कार्य करने वाले कई अन्य नामी कंपनियां राज्य में आएंगी।

क्या है ब्रह्मोस
ब्रह्मोस एक कम दूरी की रैमजेट, सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है। इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है। यह 10 मीटर की ऊँचाई पर उड़ान भर सकती है और रडार की पकड में नहीं आती। ब्रह्मोस अमेरिका की टॉम हॉक से लगभग दुगनी अधिक तेजी से वार कर सकती है। इसकी प्रहार क्षमता भी टॉम हॉक से अधिक है। रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है। यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है।

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