तीन तलाक को सामाजिक बुराई बताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के अगले ही दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इसे देश की ज्वलंत समस्या बताया।
उन्होंने तीन तलाक को द्रौपदी के चीर हरण जैसा बताते हुए कहा कि जो लोग इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चुप हैं, वे भी अपराध में भागीदार हैं।
मुख्यमंत्री योगी सोमवार को विधानभवन के सेंट्रल हॉल में पूर्व पीएम चंद्रशेखर की जयंती पर ‘राष्ट्र पुरुष चंद्रशेखर, संसद में दो टूक’ पुस्तक के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने द्रौपदी के चीर हरण का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त पूछा गया था कि इस घटना का दोषी कौन है।
महाभारत के अहम चरित्र विधुर ने जवाब दिया था कि जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया, वे तो अपराधी हैं हीं, सहयोगी और मौन रहने वाले भी इस अपराध में भागीदार हैं। इसी तरह से तीन तलाक को लेकर जो राजनेता मौन हैं, वे भी अपराध में भागीदार हैं।
समान नागरिक आचार संहिता के समर्थक थे चंद्रशेखर
कार्यक्रम में मौजूद राजा भैया व सीएम योगी व अन्य
- फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर एक देश में एक कानून के प्रबल पक्षधर थे। उन्होंने मुलायम सिंह यादव का नाम लिए बिना समाजवादी परिवारवाद पर भी निशाना साधा।
योगी सोमवार को विधानभवन के सेंट्रल हॉल में ‘राष्ट्रपुरुष चंद्रशेखर, संसद में दो टूक’ पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। सीएम ने कहा कि चंद्रशेखर शाश्वत वैचारिक क्रांति के प्रतीक थे।
उन्होंने समाजवादी विचारधारा में परिवारवाद, जातिवाद और गुंडागर्दी का हमेशा विरोध किया। वे समाजवाद के सच्चे पुरोधा थे। राष्ट्रवादी या समाजवादी, कोई भी विचारधारा हो, अगर सही मायने में आगे बढ़ती है तो देश का कल्याण होता है।
चंद्रशेखर कहा करते थे कि कश्मीर महज एक भूखंड नहीं है। अगर कश्मीर देश से अलग हुआ तो धर्मनिरपेक्षता और एकता के हमारे मूल्य भी चले जाएंगे। श्रीलंका के विवाद के बारे में भी उनका रुख एकदम स्पष्ट था। वे एकमात्र समाजवादी थे, जिन्होंने संघ परिवार के स्वदेशी आंदोलन का खुलकर समर्थन किया।
समाजवादी होते हुए भी उनमें आध्यात्मिक भावना कूट-कूटकर भरी हुई थी। चंद्रशेखर कभी गोरखनाथ मंदिर नहीं गए, पर मंदिर की कार्यप्रणाली से अच्छी तरह वाकिफ थे।
कांग्रेसी होने के बावजूद इमरजेंसी का किया विरोध
- फोटो : amar ujala
योगी ने कहा कि कांग्रेस में होने के बावजूद चंद्रशेखर ने इमरजेंसी के फैसले का विरोध किया था। लोकतंत्र के लिए नेपाल में चले आंदोलन का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कभी वोट बैंक की राजनीति नहीं की।
यही वजह थी कि अकेले होते हुए भी संसद में उनकी आवाज काफी वजनदार होती थी। कम समाजवादी नेता ऐसे होते हैं, जिन्होंने अपने परिवार की चिंता नहीं की। उन्होंने कहा कि संसद में सकारात्मक और गंभीर बहस-मुबाहिसे भी खूब होते हैं, पर मीडिया नकारात्मक बातों को ही ज्यादा दिखाता है। समाज निर्माण में मीडिया की अहम भूमिका है, इसलिए उसे अधिकाधिक नकारात्मक खबरें दिखाने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए।
लगा कहीं गलती से तो आमंत्रित करने नहीं आ गए
योगी ने कहा, पूरी उम्मीद है कि चंद्रशेखर पर लिखी गई यह पुस्तक असाध्य मानी जाने वाली समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करेगी। इसे पढ़ने के बाद समाजवाद के बारे में लोगों की अवधारणा बदलेगी। उन्होंने कार्यक्रम में बुलाने के लिए आयोजकों का आभार जताया। बोले-पहले लगा कि आयोजक गलती से तो मुझे आमंत्रित करने नहीं आ गए।
कॉमन सिविल कोड जरूरी
सीएम योगी समान नागरिक संहिता को जरूरी बताते हुए कहा कि पूर्व पीएम चंद्रखेशर भी इसके प्रबल समर्थक थे। वे कहा करते थे कि एक देश में एक ही कानून होना चाहिए। राजनीति सदैव राष्ट्र और संविधान के दायरे में होनी चाहिए। अगर ऐसा होगा तो न तो संवैधानिक संस्थाओं के बीच टकराहट पैदा होगी और न ही कानून की समस्या उत्पन्न होगी।