लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंड पीठ पाकिस्तानी नागरिक तासीन अजीम को उसके मुल्क भेजने का आदेश देते हुए पुलिस उसके पाकिस्तानी खुफिया एजेेंसी से संपर्क को साबित नहीं कर सकी। बताया गया है कि राज्य सरकार की ओर से 2006 के मुकदमे में सत्र अदालत की ओर से देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के प्रयास संबंधी विभिन्न धाराओं में तासीनको बरी किए जाने को चुनौती दी गई थी।
ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन ऐसी कोई जानकारी नहीं दे सका, जो पाकिस्तानी खुफि या एजेंसी को भेजी गई। यह जरूर सिद्ध किया गया कि उसने पाकिस्तान में जावेद नाम के शख्स को कुछ ई-मेल भेजे, लेकिन वे ई-मेल क्या थे, यह अभियोजन स्पष्ट नहीं कर सका है। यह भी सिद्ध नहीं किया जा सका है कि अभियुक्त किसी भी प्रकार की आतंकी गतिविधि में संलिप्त था। सरकारी वकील ने दलील दी कि अभियुक्त को मिली सजा अपर्याप्त है, वह आईएसआई के एजेंट के तौर पर देश में काम कर रहा था। हालांकि, कोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों को देखते हुए, ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सही माना और सरकार की अपील खारिज कर दी।
घुसपैठ, फ र्जी दस्तावेजों का कबूला था अपराध
ट्रायल कोर्ट के समक्ष दिए बयान में तासीन ने भारत में अवैध रूप से आने और कूटरचित दस्तावेज तैयार करवाने के अपराध को कुबूल किया, लेकिन युद्ध छेड़ने जैसे आरोपों से इनकार किया। उसका कहना था कि उसने जो अपराध किया, उसकी सजा उसे मिल चुकी है, उसे एक मौका दिया जाना चाहिए।
यह था मामला
तासीन को एसटीएफ ने 13 सितंबर, 2006 को गिरफ्तार किया था। वह लखनऊ में लारेब खान पुत्र गुलाब खान की नकली पहचान के साथ रह रहा था। वह मूलत: उत्तरी कराची के सेक्टर 11 एए मकान नंबर 522 का रहने वाला है। वह दो-दो कंपनियों में काम भी कर चुका था। साथ ही राहुल सिद्धार्थ और फ रीउद्दीन के साथ पार्टनरशिप की कंपनी चला रहा था। एसटीएफ ने दावा किया था कि अभियुक्त का आईएसआई को सेना संबंधी और अन्य गोपनीय सूचनाएं जावेद के माध्यम से मुहैया कराई।