पहले साल 2018 में काले चावल का करीब 300 कुंतल उत्पादन हुआ। इसकी शुरुआती कीमत 200 रुपये प्रति किलोग्राम बीज तथा 300 रुपये प्रति किलोग्राम चावल तय की गई थी। 2019 में 8000 कुंतल रसायन मुक्त काले धान का उत्पादन हुआ। इसमें से करीब 850 कुंतल धान नई दिल्ली व मुंबई के निर्यातकों को 8500 रुपये प्रति कुंतल की दर से थोक में बेचा गया। इस बार 17,500 कुंतल धान उत्पादन का अनुमान है। करीब 2000 कुंतल निर्यात की योजना है।
यह भी महत्वपूर्ण
- जैविक खाद की आपूर्ति राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत बने वर्मी कंपोस्ट पिट व मनरेगा से बने नाडेप कंपोस्ट पिट से किया गया।
- चंदौली में उत्पादित काला चावल को कलेक्टिव मार्क के लिए आवेदन किया गया। इसका वित्तपोषण नाबार्ड ने किया।
- काले चावल में मधुमेह रोधी व कैंसर रोधी क्षमता होती है।
गुणवत्ता की कसौटी पर खरा
काला चावल के नमूनों को सेंटर आफ फूड टेक्नोलॉजी प्रयागराज, इंडियन इंस्टीट्यूट आफ राइस रिसर्च हैदराबाद, इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट वाराणसी, एसजीएस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली की प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा गया। इन सभी प्रयोगशाला में प्रमाणित किया कि इसमें किसी भी रसायन के अवशेष नहीं है तथा डाइटरी फाइबर, जिंक, विटामिन, आयरन व एंटी ऑक्सीडेंट (एंथ्रोसाइनिन) प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। काले चावल की गुणवत्ता के लिए एफएसएएआई से लाइसेंस प्राप्त किया गया।
मद-- सामान्य चावल-- काला चावल
बीज (प्रति हेक्टेयर)-- 30 किग्रा. -- 15 किग्रा
लागत (प्रति हेक्टेयर)-- 5800 रु.-- 4200 रु.
उत्पादकता (प्रति हेक्टेयर)-- 62 कुंतल-- 35 कुंतल
बाजार मूल्य (प्रति कुंतल)-- 1815 रु.-- 8500 रु.
प्राप्त मूल्य(प्रति हेक्टेयर)-- 112530 रु-- 297500 रु.
शुद्ध लाभ -- 54530 रु. -- 255500 रु.
फसल उत्पादन-- 150-155 दिन-- 125-135 दिन
फुटकर मूल्य-- 30-50 रु. किग्रा-- 300 रु/किग्रा
आईएएस नवनीत चहल का कहना है कि काला धान के अभिनव प्रयोग से कृषि क्षेत्र में ऐसा प्लेटफार्म और ट्रैक तैयार किया गया है जिससे किसनों की आय में तेजी से वृद्धि होगी। इससे चंदौली की अर्थव्यवस्था में दूरगामी बदलाव आएगा। जीडीपी में चंदौली का योगदान भी बढ़ेगा और आने वाले समय में जिला आकांक्षात्मक जिले की श्रेणी से बाहर निकलने में सफल होगा।
चंदौली काला चावल कृषक समिति के अध्यक्ष शशि कांत राय का कहना है कि काला धान का उत्पादन किसानों का भाग्य बदलने वाला है। 30 प्रगतिशील किसानों के साथ शुरू हुई यात्रा 1200 के समूह तक पहुंच गई है। पिछले वर्ष एक निर्यातक के जरिए काला धान का निर्यात ऑस्ट्रेलिया व कतर में किया गया था। इस बार कई निर्यातकों से बात हो रही है। करीब 2000 कुन्तल काला धान निर्यात की योजना है।