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अब माया से अंबेडकर भी छीनेंगे पीएम मोदी!

Thu, 04 Dec 2014 12:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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गांधी, नेहरू, पटेल व जयप्रकाश नारायण के बाद अब बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर भी भाजपा के एजेंडे में नए तेवर व नए कलेवर के साथ शामिल हो गए हैं। पार्टी ने उनके महापरिनिर्वाण दिवस 6 दिसंबर से देश भर में दलितों को भाजपा से जोड़ने का अभियान चलाने की योजना बनाई है।
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इसके तहत भाजपाई दलित बस्तियों में अनुसूचित जातियों के लिए देश भर में भाजपा सरकारों में हुए काम बताएंगे। उनके दिमाग में यह बात बैठाने की कोशिश करेंगे कि मायावती हों या कांग्रेस, ये सिर्फ कहती हैं, जबकि भाजपा कहती नहीं, बल्कि काम करती है।
रही दूसरे दलों की बात तो इनके एजेंडे में दलित हैं ही नहीं। कुल मिलाकर कोशिश भाजपा के चेहरे पर दलित हितैषी रंग को गाढ़ा करने की है। तय किया गया है कि भाजपा नेता दलित बस्तियों व झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर वहां के लोगों के साथ बैठक करेंगे।
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बस्तियों में सफाई व स्वास्थ्य के लिहाज से जरूरी कामों की फेहरिस्त बनाएंगे। फिर विभिन्न योजनाओं के जरिये उन्हें पूरा कराएंगे। इन बस्तियों के बच्चों को स्कूल भेजने के लिए लोगों को प्रेरित करेंगे। दाखिले में आने वाली समस्याओं का समाधान कराने के साथ ही अन्य दिक्कतें दूर करने में भी मदद करेंगे। योजना यह भी बनाई गई है कि भाजपा के बड़े नेता कुछ दलित बस्तियों को गोद लें।

अंबेडकर का आशीर्वाद, मोदी का साथ

इस अभियान के लिए भाजपा का नारा होगा- ‘बाबा अंबेडकर का आशीर्वाद, चलो चलें मोदी के साथ।’ पार्टी के प्रदेश महामंत्री व सदस्यता प्रमुख स्वतंत्रदेव सिंह बताते हैं कि अभियान के दौरान दलित बस्तियों में लोगों को बताया जाएगा कि भाजपा ने दलितों की भलाई के लिए क्या-क्या किया?

साथ ही यह सवाल भी रखा जाएगा कि वे भाजपा विरोधी दलों से पूछें कि उन्होंने अपने शासन में दलितों व अंबेडकर के सम्मान के लिए क्या किया। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिवाकर सेठ के मुताबिक, बसपा, कांग्रेस व दूसरे दलों ने अनुसूचित जातियों को बहुत दिनों तक ठगा। भावनात्मक तरीके से उनका शोषण किया। बसपा ने अंबेडकर का नाम लेकर सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ ही साधे।

आज बसपा और कांग्रेस -दोनों ही दल अंबेडकर के सबसे बड़े अनुयायी होने का दावा करते हैं। इसलिए इनसे पूछा जाना चाहिए कि इन्होंने अंबेडकर से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के विकास के लिए आज तक क्या किया।

जहां तक भाजपा का सवाल है तो डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पहले व्यक्ति थे जिन्होंने डॉ. अंबेडकर से उस समय राज्यसभा जाने का आग्रह किया जब कांग्रेस ने उन्हें लोकसभा या राज्यसभा न जाने देने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी थी। बावजूद इसके डॉ. मुखर्जी की कोशिश से डॉ. साहब पश्चिम बंगाल से राज्यसभा पहुंच ही गए।
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भाजपा खोलेगी कांग्रेस के कामों का चिट्ठा

दलित बस्तियों में लोगों को समझाया जाएगा कि कांग्रेस ने देश में 60 साल से ज्यादा शासन संभाला, लेकिन उसे दिल्ली के अलीपुर रोड स्थित उस बंगले को संरक्षित करने की फिक्र नहीं हुई जहां डॉ. साहब ने अपना जीवन गुजारा और अंतिम सांस ली।

भाजपा के शीर्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने बतौर प्रधानमंत्री वर्ष 2002 में इस बंगले को संबंधित व्यक्ति से 36 करोड़ रुपये में खरीदवाकर उसे संग्रहालय के रूप में विकसित करने का फैसला किया। इसके लिए 16 करोड़ रुपये आवंटित किए, लेकिन कांग्रेस राज में 10 साल इसका काम रुका रहा। अब फिर इसे शुरू करने की तैयारी है।

दलितों को बताएंगे कि नागपुर में बाबा साहब का दीक्षास्थल हो या चैत्य भूमि (मुंबई में चौपाटी का वह स्थान जहां उनका अंतिम संस्कार हुआ), इनका सुंदरीकरण भी भाजपा की सरकारों में हुआ। अंबेडकर के महू (मध्यप्रदेश) स्थित घर, जहां उनका जन्म हुआ था, उसका भी संग्रहालय के रूप में विकास मध्यप्रदेश की सुंदरलाल पटवा सरकार ने कराया। पटवा के बाद बनी कांग्रेस सरकारों ने इस स्थान की उपेक्षा की। दोबारा इस स्थल के संरक्षण व सुंदरीकरण की चिंता तब हुई जब शिवराज सिंह चौहान की सरकार बनी।

दरअसल भाजपा लोकसभा चुनाव में पार्टी के करीब आए दलितों को न सिर्फ साथ जोड़कर रखना चाहती है बल्कि इस जुड़ाव को और मजबूत बनाना चाहती है। पार्टी के रणनीतिकारों की फिक्र है कि लोकसभा चुनाव के दौरान इस वर्ग का युवा मतदाता जिस तरह पार्टी से जुड़ा, उसे यह महसूस भी होना चाहिए कि डॉ. अंबेडकर जैसे महापुरुष से भाजपा का लगाव बहुत पुराना है।
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