यूपी में चुनाव आचार संहिता के दौरान पीडब्ल्यूडी में बड़ा घपला पकड़ में आया है। वहां सारे नियम-कायदे ताक पर रखकर 124 चहेते बाबुओं को अवर अभियंता (जेई) बना दिया गया।
इंजीनियरिंग के जिस डिप्लोमा के आधार पर उन्हें प्रमोशन दिया गया, उसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अमान्य ठहरा दिया है। बताते हैं कि इन अवैध प्रमोशनों के पीछे करोड़ों रुपये के लेन-देन का बड़ा खेल हुआ है।
अगली सरकार के गठन होने पर कहीं यह मामला गले की हड्डी न बन जाए, इसलिए आनन-फानन में पूरे मामले की जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।
पीडब्ल्यूडी में अवर अभियंता के 5 फीसदी पद बाबुओं की पदोन्नति से भरने का नियम है। तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की नियमावली में यह संशोधन वर्ष 2013 में किया गया। इसके तहत इंजीनियरिंग का वैध डिप्लोमा हासिल कर चुके बाबू इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं।
डिप्लोमा के आधार पर बना दिया गया जेई
इस संशोधन के बाद तमाम बाबुओं ने राजस्थान के एक विश्वविद्यालय से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से दो वर्षीय डिप्लोमा हासिल कर लिया। उस डिप्लोमा के आधार पर ही कुछ समय पहले पूरे प्रदेश में 124 बाबुओं को जेई बना दिया गया।
कायदे से तो पहले डिप्लोमा का सक्षम संवैधानिक संस्था से सत्यापन करवाना चाहिए। इसके बाद ही नियुक्ति पत्र जारी करने का प्रावधान है। लेकिन, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने इस पूरी प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया।
नियुक्ति पत्र देने के बाद जब उनके दस्तावेजों पर यूजीसी की राय ली गई, तो पता चला कि तकनीकी शिक्षा (डिग्री या डिप्लोमा) के लिए यूजीसी ने किसी भी विश्वविद्यालय को ऑफ कैंपस या स्टडी सेंटर चलाने की अनुमति ही नहीं दी है। किसी भी दूरस्थ शिक्षा केंद्र के माध्यम से ली गई इंजीनियरिंग की डिग्री या डिप्लोमा अमान्य है।
सभी जोनों से मांगी गई रिपोर्ट
यूजीसी की इस रिपोर्ट को संलग्न करते हुए पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता (परिकल्प) एके शर्मा ने सभी जोनों से रिपोर्ट मांगी है। इसमें कहा गया है कि पदोन्नति पाने वाले बाबुओं का नाम, पदोन्नति का आधार और तैनाती स्थल का ब्योरा 15 फरवरी तक मुख्यालय को हर हाल में उपलब्ध कराया जाए।
बनाई गई कमेटी
इस पर पीडब्ल्यूडी के विभागाध्यक्ष वीके सिंह का कहना है कि 124 बाबुओं को मिली प्रोन्नति की समीक्षा की जा रही है। इसके लिए एक कमेटी का गठन कर दिया गया है। साथ ही दूरस्थ शिक्षा के आधार पर हासिल किए गए डिप्लोमा के आधार पर आगे किसी को पदोन्नति न देने का फैसला भी किया गया है।