प्रदेश में कंपनी, पार्टनरशिप फर्म, न्यास, समिति और शैक्षिक संस्था आदि के नाम पर सरकार की बिना अनुमति तय सीमा से अधिक खरीदी या प्राप्त की गई भूमि को विनियमित कराने की राह खुल गई है। सर्किल रेट का 50 प्रतिशत जुर्माना अदा कर ऐसी भूमि को विनियमित कराया जा सकेगा।
नियमों में इस प्रावधान को शामिल करते हुए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके लिए राजस्व संहिता की धारा-89 की उपधारा 2 व 3 में आवश्यक प्रावधान कर दिया गया है।
प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिन्होंने नियम-कायदे को ताक पर रखकर तय सीमा 5.0586 हेक्टेयर से अधिक भूमि खरीदी या प्राप्त की या फिर जमीन पर कब्जा कर कारोबार व व्यवसाय कर लाभ लेने लगे। लेकिन कानूनी तौर पर ऐसी भूमि उनके नाम नहीं आ पाई।
बिना सही जानकारी दिए जमीन अपने नाम करा भी ली तो भविष्य में उसके खुलासे की संभावना बनी रही। तमाम लोग ऐसी भूमि से संबंधित प्रकरण कोर्ट-कचहरी में लंबित कर किसी तरह जमीन पर कब्जा बनाए हुए हैं। ऐसे लोग जमीन को विनियमित कराने का वैधानिक रास्ता खोज रहे थे। अब सरकार ने ऐसे लोगों से जुर्माना लेकर जमीन को विनियमित करने का फैसला किया है।
अफसरों का तर्क, सरकार को मिलेगा राजस्व
अफसरों का तर्क है कि बिना अनुमति तय सीमा से अधिक खरीदी गई भूमि से सरकार को कोई लाभ नहीं हो रहा था और संबंधित व्यक्ति या संस्थाएं उसका पूरा लाभ उठा रही थीं। ऐसे में जुर्माना लगाने से सरकार को राजस्व प्राप्त होगा और पहले से ही उनके कब्जे की जमीन विनियमित हो जाएगी। इससे राजस्व वादों में कमी भी आएगी।
सर्किल रेट के हिसाब से 50% लगेगा जुर्माना
अधिसूचना के मुताबिक किसी रजिस्ट्रीकृत फर्म, कंपनी, पार्टनरशिप फर्म, लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप फर्म, न्यास, समिति अथवा किसी अन्य शैक्षिक या किसी पूर्त संस्था द्वारा यदि पूर्व अनुमोदन प्राप्त किए बिना भूमि प्राप्त की गई या खरीदी गई, उसे सरकार अब विनियमित कर सकेगी।
इसके लिए सरकार या इसके लिए नामित अधिकारी तय जुर्माना लगाकर विनियमित करेंगे। सरकार ने जुर्माने के रूप में आवेदन करते समय प्रचलित सर्किल दर के अनुसार तय सीमा से अधिक भूमि की लागत का 50 प्रतिशत तय किया है।