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काकोरी शहीदों की पुरानी प्रतिमाएं हटाने पर नाराजगी

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काकोरी शहीद स्मारक में लगी पुरानी प्रतिमाएं हटाने और विरोध को अनसुना करने पर शहीद स्मृति समारोह समिति ने नाराजगी जाहिर की है। महामंत्री व क्रांतिवीर स्व. रामकृष्ण खत्री के पुत्र उदय खत्री ने कहा कि शासन की इस कार्यवाही से क्षुब्ध होकर हमने किसी भी सम्मान समारोह में शामिल न होने का निर्णय लिया है।
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उनकी इस नाराजगी को लेकर अमर उजाला ने जब उदय खत्री से संपर्क किया और वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि गुपचुप प्रतिमा हटाने को लेकर बीते दिनों ही मीटिंग में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना था कि बेमेल होेने के कारण उसे हटाया गया। मेरा सवाल ये है कि क्रांतिवीरों को क्या उन्होंने देखा है या उन्हें देखने वाले जिंदा हैं।
मनमाथ नाथ गुप्त व रामकृष्ण खत्री से अनुमोदन के बाद लगी थी प्रतिमा
उदय खत्री ने बताया कि यहां पर पहले संगमरमर की प्रतिमा लगी थी, जिसके बेमेल होने, किसी भी क्रांतिकारी से चेहरा न मिलने और संगमरमर की क्वालिटी अच्छी न होने पर मेरे पिताजी यानी स्व. रामकृ ष्ण खत्री और क्रांतिवीर मनमथनाथ गुप्त ने विरोध जताया था। उस दौरान एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल मोतीलाल वोरा से मिला था। उस प्रतिनिधिमंडल में मैं, डॉ. कंचन लता सब्बरवाल, लीला धर शर्मा पर्वतीय, लेफ्टीनेंट एसके वर्धन भी शामिल थे। मोतीलाल वोरा ने आपत्ति को स्वीकार करते हुए धातु की मूर्ति लगाने का आदेश दिया। साथ ही ये भी कहा था कि मनमथनाथ और रामकृष्ण के अनुमोदन के बाद ही मूर्ति लगवाई जाए। उसके बाद मूर्ति तैयार कर उसका अनुमोदन करवाया गया, यह 1996 की बात है। 1999 में जब कल्याण सिंह मुख्यमंत्री थी, तब ये मूर्तियां यहां लगवाई गईं।
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मुझे नई से आपत्ति नहीं, पुरानी हटाना गलत
उदय खत्री ने कहा कि किसी से बात करने की जरूरत तक नहीं समझी गई, ये गलत है। मुझे नई मूर्ति से आपत्ति नहीं है, इतना बड़ा क्षेत्र है, कहीं भी लगाएं। पुरानी को हटाना गलत है।
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