फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अल्ट्रासाउंड से इस तरह बच सकती है गंभीर मरीज की जान

Tue, 03 Nov 2015 05:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
इमरजेंसी में अंदरूनी चोटों का पता लगाने के लिए एक्स-रे, सीटी और एमआरआई नहीं अल्ट्रासाउंड मशीन ही काफी है, वो भी पोर्टेबल। दुर्घटना में घायल मरीज के फेफड़ों में हवा भर जाए, या पेट के अंदर ब्लीडिंग हो रही हो तो इसका पता अल्ट्रासाउंड से लगाया जा सकता है।
विज्ञापन


इससे मरीज को तुरंत इलाज मिल जाएगा और उसकी जान बच जाएगी। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अतुल अग्रवाल ने एक स्थानीय होटल में आयोजित लखनऊ अल्ट्रासाउंड कोर्स में सोमवार को ये जानकारी ने दी।

डॉ. अतुल अग्रवाल ने बताया कि इमरजेंसी व ट्रॉमा की स्थिति में दिल, फेफड़ों, पेट (लिवर व किडनी) की चोटों का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड सबसे कारगर उपकरण है। इसे मॉडर्न आंखें या फिर विजुअल स्टेथोस्कोप भी कहते हैं।
विज्ञापन


अल्ट्रासाउंड को इमरजेंसी जांच में शामिल करने के बाद अच्छे रिजल्ट सामने आए हैं। इससे घायलों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाने के दौरान ही चोटों का पता लगाया जा सकता है और रास्ते में जरूरी इलाज मुहैया कराया जा सकता है।

फेफड़ों में हवा भरी हो तो अल्ट्रासाउंड गाइडेड निडल से उसे पंचर कर हवा निकाल दी जाती है। इससे मरीज की जान बच जाती है। क्योंकि फेफड़ों में हवा भरने की स्थिति में मात्र तीन से चार मिनट में ही मरीज की जान जा सकती है। फेफड़े में हवा भरने पर वो दिल पर दबाव बढ़ाने लगते है और मरीज का हार्ट फेल हो जाता है।
विज्ञापन


और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें