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Samvad: 'अग्निवीर' की तारीफ, पाकिस्तान दुश्मनी के लायक नहीं; निंभोरकर बोले- राजनेताओं के बच्चे भी सेना में आएं

Mon, 26 Feb 2024 03:02 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

सेना के लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र रामाराव निंभोरकर ने कहा कि जम्मू कश्मीर के उरी हमले के बाद हमने यह तय कर लिया था कि जवाब देना है तब उस समय के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि जवाब देने की तैयारी करो और हमने प्लान को लागू करने का निर्णय ले लिया।
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Amar Ujala Samvad - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमर उजाला संवाद में 'देश के सम्मान की बात' सत्र में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राजेंद्र रामराव निंभोरकर ने अग्निवीर योजना की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह एक अग्निवीर योजना अच्छी है। इससे लोगों में अनुशासन आएगा और लोग सेना को जानेंगे। जो निकम्मा होगा उसे ही काम नहीं मिलेगा, बाकी सभी को काम मिल जाएगा। 
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अग्निवीर से रिटयर होने के बाद बीस-पच्चीस लाख मिल जाएंगे। फिर उसे अनुभव के आधार पर काम मिल जाएगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि सिर्फ 25 प्रतिशत सैनिकों को चार साल के बाद रोकना यह कम सही है। इसे बढ़ाना चाहिए।

अनुच्छेद 370 हटाना ही चाहिए था
लेफ्टिनेंट जनरल निंभोरकर ने कहा कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना सही फैसला था। इससे आतंकवाद में कमी आएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि कश्मीर की समस्या हल करनी है तो 370 हटाना ही चाहिए था। उन्होंने कहा कि इसमें समय लग सकता है पर इससे निश्चित रूप से हालात बदलेंगे। अब वहां पत्थरबाजी की घटनाएं सामने नहीं आती हैं।
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राजनेताओे के बच्चे भी सेना में आने चाहिए: निंभोरकर
उन्होंने कहा कि कश्मीर में गरीबी नहीं है। वहां के लोग कहते हैं कि हमने आज सिर्फ पनीर खाया है मांस नहीं खाया। ये लोग उतना गरीब नहीं है जितना कि भारत के अन्य हिस्सों के लोग हैं। एक सवाल के जवाब में निंभोरकर ने कहा कि देश के सभी सेवाओं से जुड़े लोगों को कम से कम तीन साल सेना मे काम करना चाहिए। राजनेताओें के बच्चे भी सेना में आने चाहिए। 

इससे पहले, उन्होंने कहा कि देखिए, मैं तो हमेशा यूथ की बात करता हूं। मैं हमेशा कहता हूं मैं क्रिकट का बड़ा फैन हूं, हम अपनी बैटिंग करके निकल गए अब आप लोगों को ही देखना है। मैं अपना एक अपना अनुभव शेयर करता हूं और इसके साथ ही मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं। 1988 में जिया उलहक की डेथ हो गई थी उसके बाद एक पाकिस्तानी चौकी को काबिज करने का एक ऑर्डर मिला था। वहां पर तापतान काफी कम हो रहता था। पाकिस्तान की एक चौकी हमारे से काफी ऊंचाई पर थी और वहां से रोज फायर किए जाते थे। इसमें हमारे जवान घायल हो जाते थे। दो जेसीओ और आठ जवान इसमें शहीद हो गए। 

उन्होंने कहा कि एक हम बंकर बना रहे थे और तभी एक गोली हमारे जवान को माथे को छूकर निकल गई। हमने उससे कहा तुम घबराना मत और हमारे पास वहां पर एक टेलीफोन होता था पुराने समय वाला। हमने उससे संपर्क किया और कहा कि हम अगर तुम्हारे पास आएंगे तो मारे जाएंगे। तुम पचास फीट पीछे चले जाओगे तो एक खाई है और उसमें वो तुम्हारे ऊपर फायर नहीं कर पाएंगे। मैंने उससे कहा जब हम बोले की मूव करो तो कुछ मत करना बस पीछे चले जाना, उसने कहा ठीक है साहब मैं करूंगा। मैं और मेरा जेसीओ एक पत्थर के पीछे थे, मैंने उसको बोला कि हमें हरकत करनी होगा ताकि पाकिस्तानी चौकी पर बैठे सिपाहियों का ध्यान हमारी ओर रहे। अगर हम ऐसा नहीं करते तो हमारा जवान सोचता कि इन्होंने तो हमें यहां मरने के लिए छोड़ दिया। तो यह एक सोचा समझा जोखिम था, और जिंदगी में कभी मैंने वो आर्मी की हेलमेट नहीं पहनी थी जो इस समय दी जाती थी, क्योंकि वो इतनी भारी होती थी कि मुझे लगता था कि इसको पहनने से ही आदमी मर जाएगा। लेकिन पता नहीं उस दिन क्या हुआ और मैंने वह हैलमेट पहन ली और अपने जेसीओ अजीत साहब से कहा, आप पहले शूट करो।

'अगर उसे नहीं पहना होता तो मेरी तस्वीर वहां पर लगी होती'

उन्होंने शूट करना शुरू किया तो मैंने अपने जख्मी साथी से कहा कि अब तुम पीछे हटना शुरू करो। लेकिन उसके बाद पाकिस्तानियों ने बहुत तेज फायरिंग शुरू कर दी। मुझे लगा आज तो बचना मुश्किल है। मुझे एक पत्थर से दूसरे पत्थर तक पहुंचना था जिसके बीच में पचास फीट की दूरी थी। मैं दूसरे पत्थर की बीच बहुत तेज दौड़ा, अगर उसेन बोल्ट भी होता तो मैं उसको हरा दिया होता। इस बीच एक गोली मेरे हैलमेट में लगी, आज भी वो मेरी दीवार पर टंगा हुआ है, अगर उसे नहीं पहना होता तो मेरी तस्वीर वहां पर लगी होती। कहने का यह मतलब है कि अगर आप कोई काम सही मन से करते हैं तो ऊपर वाला आपको बचा देता है। यह तीसरी बार था जब मैंने मौत को चकमा दिया। यह मैं आपको बात बता देना चाहता हूं कि जब सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी तो देखा पूरे देश में इसका जोश है। अच्छा लगा कि पूरा देश हमारे पास खड़ा हुआ था।


 

सर्जिकल स्ट्राइक के नायक बोले
इससे पहले, सेना के लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र रामाराव निंभोरकर ने कहा कि जम्मू कश्मीर के उरी हमले के बाद हमने यह तय कर लिया था कि जवाब देना है तब उस समय के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि जवाब देने की तैयारी करो और हमने प्लान को लागू करने का निर्णय ले लिया। अमर उजाला संवाद में 'देश के सम्मान की बात' सत्र में लेफ्टिनेंट जनरल निंभोरकर ने सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में विस्तार से बताया। 

उन्होंने कहा कि इसके पहले भी मुंबई हमला हुआ था पर इस तरह का जवाब नहीं दिया गया था। इसकी जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को थी। हमें सिर्फ छह दिन के भीतर ही सारे उपकरण उपलब्ध हो गए। लेफ्टिनेंट जनरल निंभोरकर ने सर्जिकल स्ट्राइक की गोपनीयता पर कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में मेरी यूनिट को भी कुछ पता नहीं था। सर्जिकल स्ट्राइक में हमने 82 आतंकी मारे, हमारे एक भी सैनिक को कुछ नहीं हुआ। हमने हमला करने का वक्त वो चुना जिस समय लोग सबसे गहरी नींद में होते हैं। जैसा उरी फिल्म में दिखाया गया वैसा नहीं हुआ। फिल्म तो मिर्च मसाला लगाकर पेश करती हैं। 

निंभोरकर ने कहा कि मुझे लगता है कि आजादी के बाद अगर सबसे अच्छा कोई रक्षामंत्री हुआ है तो वो मनोहर पर्रिकर हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर मुंबई हमले के बाद भी इसी तरह के कदम उठाए गए होते तो बाद के हमले नहीं होते। इस तरह के निर्णय लेने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत होती है।


 
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पाकिस्तान को मैं ऐसा नहीं मानता कि दुश्मन कहूं...
निंभोरकर ने कहा कि अब तकनीक और सूचनाओं के क्षेत्र में भारत अन्य देशों के मुकाबले बेहद मजबूत स्थिति में हैं। हमारे चीन और पाकिस्तान दो दुश्मन हैं। पाकिस्तान को मैं इस लायक नहीं मानता कि उसको दुश्मन कहें। अगर चीन के साथ युद्घ होता है तो जितना नुकसान हमारा होगा उतना ही हम उनका भी नुकसान करेंगे। उन्होंने कहा कि रक्षा के क्षेत्र में अब हम उपकरणों का आयात कर रहे हैं। अगर ऐसा ही रहा तो अगले पांच साल में हमारी इतनी ताकत बढ़ जाएगी हम रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएंगे। 
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