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अखिलेश यादव का बीजेपी सरकार पर हमला, बोले- भाजपा को सुहाता है विघटन और नफरत फैलाना

Sat, 20 Jun 2020 05:52 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि वस्तुत: भाजपा को काम करने का अभ्यास ही नहीं है। उन्हें तो विघटन और नफरत फैलाना ही सुहाता है। भाजपा का एजेंडा है कि जब बिना काम किए ही काम बन जाता है और वोट हासिल किया जा सकता है तो विकास कार्यों में समय और श्रम खपाने की क्या जरूरत है ? भाजपा को हवा महल में रहना ही अच्छा लगता है।
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अखिलेश ने शुक्रवार को वीडियो कॉलिंग के जरिए पार्टी के प्रमुख नेताओं-कार्यकर्ताओं से संगठन की गतिविधियों पर चर्चा करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने पार्टी नेताओं से क्षेत्रीय राजनीति के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने कानपुर के आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी से संपर्क किया।

बाजपेयी पेयजल की समस्या को लेकर पांच दिनों से धरना दे रहे हैं। उनके साथ कई पार्षद भी हैं जो संघर्ष में साथ दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में लोग पानी को तरस रहे है। इसके लिए विधायक को धरना देने के लिए विवश होना पड़ा। बाराबंकी के दरियाबाद क्षेत्र के मेडिकल स्टूडेंट अगस्त्य पटेल से सपा अध्यक्ष ने स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा पर चर्चा की। अगस्त्य पटेल बांदा के मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र हैं। 
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उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में नौजवानों के सामने आ रही कठिनाइयों के  बारे में बताया। अखिलेश ने पार्टी संगठन को मजबूत बनाने और 2022 में जीत के लिए अभी से बूथस्तर तक तैयारियां करने पर जोर दिया। सभी ने विश्वास दिलाया कि वे 2022 में सपा सरकार बनाने में कुछ उठा नही रखेंगे।

 
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तीन साल में नहीं बना एक भी अस्पताल

सपा अध्यक्ष ने कहा कि समाजवादी सरकार में आजादी के बाद एमबीबीएस की 500 सीटों कीं वृद्धि की गई। नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कराए। बदायूं और जौनपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना एवं नोएडा में प्रथम पोस्ट ग्रेजुएट सुपर स्पेशियलिटी बाल चिकित्सालय एवं शैक्षणिक संस्थान तथा ग्रेटर नोएडा में चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना के निर्णय सपा सरकार में लिए गए थे।

गोरखपुर में एम्स की स्थापना के लिए कीमती जमीन समाजवादी सरकार ने दी थी। लखनऊ में कैंसर अस्पताल बनाया था। भाजपा सरकार इतनी संवेदनहीन है कि बीमारी के मामलों में भी गैर जिम्मेदारी का व्यवहार करती है। उसके तीन साल के कार्यकाल में एक भी अस्पताल नहीं बना। गोरखपुर एम्स के निर्माण की गति इतनी धीमी है कि उसमें अपेक्षित काम समय से पूरा होने में बहुत वक्त लगेगा।
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