केजीएमयू मेें 15 से 30 अप्रैल के बीच 9500 सैंपलों की जांच हुई, जिसमें 205 पॉजिटिव निकले। इनमें 2632 सैंपल राजधानी के थे, जिसमें 162 पॉजिटिव थे। एक से 15 मई के बीच 13,183 सैंपल में से 294 पॉजिटिव रहे। इसमें राजधानी के 2529 सैंपलों में 72 पॉजिटिव थे। 16 से 31 मई के बीच 21,281 सैंपल में से 457 पॉजिटिव पाए गए।
इनमें राजधानी के 2655 सैंपलों में 130 पॉजिटिव निकले। एक से 15 जून के बीच 30,473 सैंपलों से 802 पॉजीटिव मिले। इसमें राजधानी के 4096 सैंपलों से 224 पॉजिटिव मिले। इनका औसत देखें तो कुल सैंपल से 2.28 प्रतिशत पॉजिटिव मिले। इसमें से राजधानी का आंकड़ा अलग करने पर अन्य जिलों का औसत 1.64 फीसदी रहा। वहीं, अकेले राजधानी का औसत 4.88 फीसदी है।
सैंपल के साथ बढ़ता जा रहा मरीजों का आंकड़ा
स्वास्थ्य विभाग ने जिस गति से सैंपलिंग बढ़ाई, उसी रफ्तार से मरीजों का आंकड़ा बढ़ा। केजीएमयू के आंकड़े देखें तो 15 से 30 अप्रैल की अपेक्षा एक से 15 मई के बीच 36 प्रतिशत सैंपल बढ़ाए गए। ऐसे में मिलने वाले मरीजों का आंकड़ा 0.89 फीसदी बढ़ गया। 16 से 31 मई के बीच सैंपलिंग का आंकड़ा 80 फीसदी बढ़ा तो मरीजों का ग्राफ 1.63 प्रतिशत बढ़ा।एक से 15 जून के बीच सैंपलिंग 90 फीसदी बढ़ी तो मरीज मिलने का औसत 3.45 फीसदी बढ़ा।
स्वास्थ्य विभाग ने जिस गति से सैंपलिंग बढ़ाई, उसी रफ्तार से मरीजों का आंकड़ा बढ़ा। केजीएमयू के आंकड़े देखें तो 15 से 30 अप्रैल की अपेक्षा एक से 15 मई के बीच 36 प्रतिशत सैंपल बढ़ाए गए। ऐसे में मिलने वाले मरीजों का आंकड़ा 0.89 फीसदी बढ़ गया। 16 से 31 मई के बीच सैंपलिंग का आंकड़ा 80 फीसदी बढ़ा तो मरीजों का ग्राफ 1.63 प्रतिशत बढ़ा। एक से 15 जून के बीच सैंपलिंग 90 फीसदी बढ़ी तो मरीज मिलने का औसत 3.45 फीसदी बढ़ा।