मानसून के राहत देते ही भले प्रदेश के लोगों ने बिजली संकट पर बखेड़ा खड़ा करना बंद कर दिया हो, पर मुख्यमंत्री ने इस संकट को मिटाने का मेगा प्लान तैयार कर लिया है।
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने शनिवार को 1825.39 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश में बनने वाले 26 बिजली उपकेंद्रों को हरी झंडी दे दी है।
इससे 15 जिलों के लोगों को फायदा मिलेगा। साथ ही वर्ष 2016 में 6420 एमवीए की क्षमता और बढ़ जाएगी।
इस योजना में 400 केवी के दो उपकेंद्र, 220 केवी के आठ उपकेंद्र, 132 केवी के 16 उपकेंद्र बनाये जाएंगे।
इन जिलों में बनेंगे उपकेंद्र
मुख्य सचिव ने कहा कि कार्यों में गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखा जाए। उन्होंने बताया कि ये उपकेंद्र लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, मुरादाबाद, मेरठ, संभल, बाराबंकी, हाथरस, अमेठी, गोंडा, बहराइच, बिजनौर, जेपी नगर, बागपत, एटा में स्थापित होंगे।
उपकेंद्रों की स्थापना से इन जिलों में बिजली आपूर्ति और अच्छी हो जाएगी।
मुख्य सचिव शनिवार को ऊर्जा विभाग की समीक्षा कर रहे थे।
परियोजना के लिए मिली क्लीयरेंस
मुख्य सचिव ने बताया कि एटा जिले में 2,660 मेगावाट की जवाहरपुर विद्युत तापीय परियोजना अब राज्य विद्युत उत्पादन निगम को स्थानान्तरित करने की सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी गई है।
इस परियोजना के लिए अधिकतर क्लीयरेन्स मिल गई है। परियोजना के लिए आवश्यक 350 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा भी मिल गया है।
बैठक में प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय अग्रवाल, उत्तर प्रदेश विद्युत उत्पादन निगम के अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक कामरान रिजवी सहित आदि अफसर शामिल हुए।