लखनऊ। अति गंभीर मरीजों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचा कर उनकी जिंदगी बचाने के लिए हर जिले में एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस (एएलएस) लगाई गई हैं। गंभीर मरीजों को यह एंबुलेंस आसानी से मिल सके इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 18 फरवरी 2019 को प्रदेश में इसका बेड़ा 150 से बढ़ाकर 250 कर दिया था। इसके बाद भी गंभीर मरीजों को एएलएस एंबुलेंस नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में उन्हें सामान्य एंबुलेंस से बड़े अस्पतालों के लिए रेफर किया जाता है और ज्यादातर मरीज रास्ते में ही दम तोड़ दे रहे हैं।
प्रदेश की राजधानी होने के नाते लखनऊ में चार एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस लगी हैं, लेकिन यहां भी अति गंभीर मरीजों की मुश्किलें कम नहीं हैं। नियमों के पचड़े से ज्यादातर को यह एंबुलेंस नहीं मिल पाती। प्रदेश में एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस का संचालन कर रही कंपनी जिगित्सा हेल्थ केयर लिमिटेड का दावा है कि डॉक्टर जरिये ही मरीज की स्थिति देखने बाद यह एंबुलेंस मुहैया कराई जाती है। जबकि हकीकत ये है कि अतिगंभीर मरीज रेफर होने के बाद एएलएस एंबुलेंस का इंतजार करते रह जाते हैं और उनकी जान बचाने के लिए मजबूरी में घरवाले सामान्य एंबुलेंस में ही मरीज लेकर निकल पड़ते हैं। इसमें कई मरीजों की जान चली जाती है। इस बारे में स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. वेदव्रत सिंह का कहना है अति गंभीर मरीजों को एएलएस एंबुलेंस मुहैया कराई जाती है। यदि ऐसे मरीजों को समय पर एएलएस एंबुलेंस नहीं मिल रही है तो कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी।
ये मामले बयां कर रहे हकीकत
सीतापुर निवासी मरीज शीला (65) की हालत गुरुवार सुबह अचानक बिगड़ गई। घरवाले उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे तो डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताकर ट्रॉमा ले जाने की सलाह दी। मरीज को एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस की जरूरत थी, लेकिन काफी देर इंतजार के बाद भी यह नहीं मिली। इसके बाद मजबूरी में सामान्य एंबुलेंस से ट्रॉमा भेजा गया। इस दौरान रास्ते में ही मरीज की मौत हो गई। बेटे वरुण ने कहा कि एएलएस एंबुलेंस मिल जाती तो शायद मां की जान बच जाती।
जानकीपुरम की निरंजना (60) असाध्य बीमारी से ग्रस्त थीं। गुरुवार सुबह उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई। उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट वाली एंबुलेंस से ट्रॉमा में शिफ्ट किया जाना था। ट्रॉमा में मरीज के आने से पहले सभी तैयारी पूरी कर ली गई थीं, लेकिन काफी देर तक एंबुलेंस नहीं आई। आखिर में उन्हें बिना वेंटिलेटर सपोर्ट वाली निजी एंबुलेंस से ट्रॉमा सेंटर लाया गया। यहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
फैजाबाद के भृगुनाथ मिश्र (50) हादसे में जख्मी हो गए थे। घरवाले उन्हें जिला अस्पताल ले गए तो डॉक्टर ने वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत बताकर ट्रॉमा ले जाने की सलाह दी। एएलएस एंबुलेंस नहीं मिली तो घर वाले उन्हें सामान्य एंबुलेंस से लेकर निकल पड़े। इस दौरान रास्ते में मरीज की हालत बिगड़ गई। ट्रॉमा कैजुल्टी आने पर डॉक्टरों ने मरीज को आनन-फानन वेंटिलेटर सपोर्ट पर डाला।
एएलएस एंबुलेंस का कोई टोल फ्री नंबर नहीं
एएलएस एंबुलेंस का संचालन कर रही कंपनी ने अभी तक इसका टोल फ्री नंबर भी जारी नहीं किया है। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है। कंपनी के मीडिया प्रभारी तरुण के मुताबिक, कंपनी का हेल्पलाइन नंबर हैं, लेकिन ये मरीजों के लिए नहीं है। इन नंबरों पर डॉक्टर कॉल करके एंबुलेंस मंगवा सकते हैं। उन्होंने बताया कि 108 पर फोन करने बाद कॉल वहां से कंपनी को आ जाती है। इसके बाद ही एएलएस मरीजों को मुहैया कराई जाती है।
दो माह में 163 केस अटेंड करने का दावा
जिगित्सा हेल्थ केयर लिमिटेड के प्रोजेक्ट हेड दीपक खरबंदा ने बताया कि कंपनी पूरी प्रदेश में एडवांस एंबुलेंस की सेवा दे रही है। लखनऊ में चार एएलएस लगी हैं। इस रेफरल ट्रांसपोर्ट सर्विस का लाभ संबंधित डॉक्टर से मिलकर लिया जा सकता है। मीडिया प्रभारी तरुण ने बताया कि एएलएस एंबुलेंस ने पिछले दो माह में 163 केस अडेंट किए हैं। इसमें वीवीआईपी की 49 ड्यूटी भी शामिल हैं। हर एंबुलेंस रोजाना दो-तीन केस अटेंड कर रही है।