लखनऊ के निरालानगर के पॉश इलाके में डॉक्टर मां डॉ. मोना जबीन खान (91) की लाश के साथ 15 दिन से इंजीनियर बेटा फिरोज जमाल खान रह रहा था। दुर्गंध उठने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस पहुंची तो एक कमरे में फोल्डिंग पलंग पर डॉ. मोना की सड़ी गली लाश मिली। जबकि 45 वर्षीय बेटी हुमा खान सोमवार से लापता है।
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एसएसपी ने फिरोज से डॉ. मोना की मौत और परिवार के सदस्यों के बारे में बातचीत की तो वह उल्टे सीधे जवाब देने लगा। बहरहाल डॉ. मोना सिंह की मौत कैसे हुई, इसकी वजह साफ नहीं हो सकी। फिरोज और हुमा को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया जा रहा है।
एएसपी ट्रांस गोमती दुर्गेश कुमार का कहना है कि पोस्टमार्टम में मौत की वजह साफ हो सकेगी। वहीं, हुमा के किसी रिश्तेदार के पास होने की जानकारी मिली है। उससे संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है।
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ऐसा लग रहा था कि सोते वक्त ही उनकी मौत हो गई
वो पुलिस वालों और राहगीरों को गाली देता रहा
- फोटो : amar ujala
एएसपी ने बताया कि डॉ. मोना के पति रहमत खान एलडीए के चीफ इंजीनियर थे। करीब 25 साल पहले उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद से डॉ. मोना बेटे-बेटी के साथ रह रही थीं। उनका शव पलंग पर सामान्य अवस्था में पड़ा था। नीचे चप्पलें रखी थीं। ऐसा लग रहा था कि सोते वक्त ही उनकी मौत हो गई।
आसपास के लोगों ने बताया कि फिरोज मेरठ डवलपमेंट अथॉरिटी में इंजीनियर था। करीब आठ साल पहले उसने वीआरएस ले लिया था। उसकी बहन मोना कई दिन से नजर नहीं आ रही। मोहल्ले के लोगों ने डॉ. मोना और हुमा की हत्या की आशंका जताई तो पुलिस के होश उड़ गए।
डॉ. मोना के फूलबाग हुसैनगंज निवासी भाई वसीम से संपर्क किया गया। उन्होंने हुमा के किसी रिश्तेदार के घर पर होने की जानकारी दी। हुमा घर छोड़कर क्यों गई, इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। हुमा से संपर्क करने के लिए पुलिस की टीम लगाई गई है।
मां को जिंदा करने के लिए कर रहा था तंत्र-मंत्र!
डॉ. मोना के कमरे से लोबान, धूपबत्ती व अगरबत्ती व राख बिखरी हुई मिली हैं। इलाकाई लोगों का मानना है कि फिरोज अपनी मां को जिंदा करने के लिए तंत्र-मंत्र कर रहा था। हालांकि, पुलिस इस बात पर यकीन नहीं कर रही। पुलिस का कहना है कि शव से उठने वाली दुर्गंध के चलते फिरोज सुबह-शाम धूपबत्ती अथवा अगरबत्ती जलाता रहा होगा।
पुलिस को देखते छत पर चढ़कर फेंकने लगा पानी की बोतल
शनिवार शाम पुलिस ने जब उसके घर पहुंचकर दरवाजा खटखटाया तो फिरोज छत पर चढ़ गया। लोगों ने शोर मचाया तो उसने छत से पानी की भरी बोतल व गुम्मे चलाना शुरू कर दिया जिससे भगदड़ मच गई। पुलिस ने किसी तरह दरवाजा खुलवाया। भीतर जाकर पलंग पर पड़ा शव देखकर फिरोज से पूछताछ की तो वह बरगलाता रहा।
आईआईटी रुड़की से की थी इंजीनियरिंग
मृतका के भाई वसीम ने बताया उनके इंजीनियर भांजे फिरोज जमाल खान ने आईआईटी रुड़की से एमटेक किया था। वह पढ़ने-लिखने में टॉपर था। इंजीनियरिंग के बाद उसका सलेक्शन मेरठ डवलपमेंट अथॉरिटी में हुआ था। वहां पर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर था। दस साल पहले उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई। वह नौकरी से वीआरएस लेकर घर पर रहने लगा।
पिता की मौत के बाद फिरोज ने घर पर ही दफना दी थी लाश
- फोटो : amar ujala
मोहल्ले के लोगों ने बताया रहमत खान की मौत संदिग्ध हालात में करीब आठ साल पहले हुई थी। फिरोज ने घर पर ही गड्ढा खोदकर उनकी लाश दफना दी थी।
कई दिन तक चीफ इंजीनियर नजर नहीं आए तो मोहल्लेवालों ने फिरोज से पूछताछ शुरू की। फिरोज ने बताया कि पिता बाहर गए हुए हैं। हालांकि, दुर्गंध उठनें के बाद मोहल्लावालों ने पुलिस को सूचना दी तो उनका शव गड्ढे से निकलवाया गया।
डॉक्टर के मकान में एक गिलास तक नहीं मिला
निरालानगर के पॉश इलाके में स्थित डॉ. मोना जबीन खान का आलीशान मकान में कभी शान-ओ-शौकत के सारे इंतजाम मौजूद थे लेकिन, आज एक गिलास तक नहीं मिला।
पुलिस डॉ. मोना की प्रोफाइल और मकान की हालत देखकर हैरान रह गई। मुहल्ले के लोगों ने बताया कि डॉ. मोना का बेटा फिरोज मानसिक रूप से अस्वस्थ है और घर का सारा सामान उठाकर बाहर फेंक देता था। राहगीर व आसपास के लोग सामान उठा ले जाते थे।
एएसपी ट्रांस गोमती ने बताया कि डॉ. मोना के बेटे और बेटी की शादी नहीं हुई थी। इलाकाई लोग परिवार के सभी लोगों का व्यवहार विचित्र बता रहे हैं। मुहल्ले में शायद ही किसी का उनके घर आना-जाना हो। कई-कई दिन तक कोई घर से बाहर ही नहीं निकलता था।
करीब तीन से चार करोड़ रुपये कीमत के मकान में न तो फर्नीचर था न ही बिस्तर और बर्तन। डॉ. मोना खुद फोल्डिंग पलंग पर सोती थीं। उनका शव जिस कमरे में मिला वहां मात्र एक कुर्सी और पानी की बोतल रखी मिली। ड्राइंगरूम भी खाली था। उसमें एक दीवान पड़ा था, इसमें शायद डॉ. मोना की बेटी हुमा सोती थीं। बाथरूम में रुई भरी हुई थी। पूछने पर फिरोज ने बताया कि पड़ोस में खट-खट की आवाजें आती हैं और धूल-मिट्टी आती है इसलिए सफाई करने के लिए रुई इतनी इकट्ठा की है।
डॉ. मोना और फिरोज बाहर से ही खाना मंगाते थे। पुलिस को घर से कागज की प्लेटें मिलीं हैं। एएसपी का कहना है कि फिरोज कागज की प्लेट पर खाना खाता था। घर के एक कोने में रसोई गैस के दो सिलेंडर रखे मिले। हालांकि, किचन में खाना पकाने के लिए कोई बर्तन नहीं था।
पुराने नोट बदलने गई है बहन
पुलिस ने हुमा के बारे में फिरोज से पूछताछ की तो उसने बताया कि बहन पुराने नोट बदलवाने के लिए गई है। जल्दी आ जाएगी।
मां को छोड़ना नहीं चाहता था इसलिए नहीं दी मौत की सूचना
एएसपी ने फिरोज से मां की मौत की सूचना न देने के बारे में पूछताछ की तो उसने कहा कि वह उन्हें छोड़ना नहीं चाहता था। वह मां से बहुत प्यार करता है। उसे डर था कि लोग उसकी मां को ले जाएगी इसलिए नहीं बताया।