प्रदेश में दस्तक अभियान के दौरान करीब 3600 टीबी के नए मरीज मिले हैं। इसमें करीब 300 मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) के मरीज हैं। इन मरीजों को संबंधित जिले के डॉट्स सेंटर से जोड़कर उपचार की रणनीति बनाई गई है।
प्रदेश में अभी करीब 1.80 लाख टीबी मरीज हैं। इसमें 15 हजार एमडीआर हैं। जुलाई में चले दस्तक अभियान के दौरान चिह्नित किए गए इन इन मरीजों को नजदीकी डॉट्स सेंटर, डॉट्स प्लस सेंटर एलाट किया जा रहा है। जो गंभीर मरीज हैं, उन्हें केजीएमयू सहित अन्य मेडिकल कॉलेजों में उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
सेंटर पर बढ़ने वाले मरीजों की संख्या के अनुसार अगस्त में संबंधित सेंटर को अतिरिक्त दवा भी भेजी जा रही है। राज्य टीबी नियंत्रण अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि टीबी मरीजों को पंजीकृत कर उन्हें पोषण योजना में शामिल किया जा रहा है। मरीजों की संख्या के अनुसार संबंधित सेंटर पर दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
लैब बनने का मिलेगा फायदा
प्रदेश में दो नई कल्चर एंड ड्रग सेंसिटिविटी लैब तैयार की जा रही है। इटावा और झांसी में खुलने वाली इस लैब से ड्रग सेंसिटिविटी के बारे में पुख्ता जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा प्रदेश में 145 सीबी नेट मशीन, 451 ट्रू नेट, नौ कल्चर लैब, 2100 माइक्रो स्कोपिक लैब, 22 नोडल ड्रग रेडिस्टेंट सेंटर, 12000 डॉट्स सेंटर चल रहे हैं।