अपने राजनीतिक जीवन में अब तक की सबसे कठिन चुनौतियों का सामना कर रहीं बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए खुद को दलित राजनीति का केंद्र बनाए रखने में मुश्किल आ सकती है। रविवार को दिल्ली के संविधान क्लब में दलित, ओबीसी व मुस्लिमों के 16 संगठनों ने बैठक की और संकेत दिए कि वो अब मायावती को अपने नेता के तौर पर नहीं देखना चाहते हैं।
सभी संगठनों को एक साथ लाने का काम पूर्व बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने किया है और राष्ट्रीय बहुजन संगठन की स्थापना की। बसपा नेता प्रमोद कुरील को इसका संयोजक बनाया गया है। उन्होंने मायावती पर हमला करते हुए कहा है कि वो दौलत की भूखी हैं और कांशीराम के रास्ते से भटक गई हैं।
कुरील ने कहा कि वह अभी तो बसपा में हैं लेकिन मायावती को अपने नेता के रूप में नहीं देखना चाहते हैं।
बता दें कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने पिछले महीने राज्यसभा से ये कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि उन्हें दलितों की आवाज उठाने का मौका नहीं दिया जा रहा है।
मायावती ने विधानसभा चुनाव के बाद नसीमुद्दीन को पार्टी से निकाल दिया था तभी से उनके अगले कदम पर सभी की निगाहें हैं।