एसएनए में दिन के उजाले में हरियाली पर आरा चलवा दिया गया। अधिकारियों ने लकड़ी के लिए यहां डेढ़ सौ हरे पेड़ कटवा डाले। अधिकारियों की दलील है कि पेड़ों की छांव से अंधेरा हो रहा था, इसलिए इनकी छंटाई कराई गई है जबकि अब यहां पेड़ों की जगह सिर्फ ठूंठ नजर आ रहे हैं।
एक ओर जहां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव प्रदेश में एक दिन में दस लाख पेड़ लगवाकर रिकॉर्ड बनवा रहे हैं, वहीं संगीत नाटक अकादमी में हरे पेड़ों पर आरा चलवाया जा रहा है।
सचिव तुलसीराम व अध्यक्ष अच्छेलाल सोनी ने करीब 150 पेड़ों पर कुल्हाड़ियां चलवा दीं। अकादमी परिसर में प्रवेश द्वार के ठीक सामने हरा-भरा मैदान है, जिसके किनारों पर कतार में करीब तीन-चार साल पहले पेड़ लगवाए गए थे।
जो करीब 10 फुट के हो गए थे। लेकिन जहां कल तक हरियाली थी, वहां अब साफ मैदान नजर आ रहा है। पेड़ों की न सिर्फ शाखाएं काटी गई हैं बल्कि, उनके तनों को भी धराशायी कर दिया गया है, जिससे अब यहां सिर्फ ठूंठ नजर आ रहे हैं।
लकड़ी के लिए काटे गए सैकंडों पेड़
वहीं इस बाबत अकादमी के अध्यक्ष अच्छेलाल सोनी ने बताया कि दरअसल, उन पेड़ों से वहां पर अंधेरा हो रहा था और सुंदरता भी निखारनी थी, इसलिए पेड़ों को कटवाया गया है।
वहां पर फूलों की क्यारियां लगवाई जाएंगी।
दूसरी तरफ एसएनए कर्मचारियों ने आशंका जताई है कि पेड़ों की कटान लकड़ियों के लिए हुई है। यह भी कहा जा रहा है कि नगर निगम उन लकड़ियों को अलाव में बांटने के लिए ले गया है।
सीमैप के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. अखिला आनंद बताते हैं कि छटाई व कटाई में अंतर होता है। अगर, तना काट दिया गया है तो यह छटाई नहीं कटाई है। इससे पेड़ मर जाता है। ठूंठ बनकर रह जाता है। जबकि छटाई होने पर पेड़ का विकास होता है। एसएनए में पेड़ों की छटाई नहीं, कटाई हुई है। छटाई से नई पत्तियां निकलती हैं और ऑक्सीजन भी ज्यादा मिलती है।
‘पेड़ों को इसलिए कटवाया गया है, क्योंकि पर्यावरण विज्ञान कहता है कि जब पेड़ों की छंटाई होती है तो नई पत्तियां व शाखाएं निकलती हैं, जो ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन उत्सर्जित करती हैं। फिर पेड़ों की जड़ें नहीं उखाड़ी गई हैं, सिर्फ तने व शाखाएं ही काटी गई हैं।’
तुलसीराम, सचिव, एसएनए
‘हरे पेड़ों को काटने पर रोक है। बुधवार को वन विभाग की टीम मौके पर जांच-पड़ताल करेगी, जिसके बाद कड़ी कार्रवाई होगी। पेड़ों की कटाई की परमिशन सिर्फ जनहित से जुड़े मामलों में ही दी जाती है। अकादमी में कटाई की अनुमति ली गई है या नहीं, यह जांच का विषय है।’
श्रद्घा यादव, प्रभागीय वन अधिकारी