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Mahashivratri 2023: महाशिवरात्रि पर क्या हैं मान्यताएं , जानें व्रत के पारण करने का शुभ मुहूर्त

Sat, 18 Feb 2023 04:09 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Happy Mahashivratri 2023 LIVE Updates: आज पूरे देश में महाशिवरात्रि मनाई जा रही है। महादेव को प्रसन्न करने और उनकी आराधना के लिए महाशिवरात्रि का त्योहार बहुत ही खास माना जाता है। आज घर-घर और गली-गली हर-हर महादेव की गूंज सुनाई दे रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।  
 
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महाशिवरात्रि 2023: फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ने वाली शिवरात्रि महाशिवरात्रि कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन माह चतुर्दशी तिथि को ही भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज शनिवार, 18 फरवरी को महाशिवरात्रि का त्योहार बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जा रहा है। आज हर घर और हर शिवालय में हर-हर महादेव की गूंज चारों तरफ सुनाई दे रही है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार महाशिवरात्रि का त्योहार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। शिवपुराण के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन देवी पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ और माता पार्वती की विशेष रूप से पूजा आराधना की जाती है। इस दिन घर और शिवमंदिर में भगवान शिव के निराकार रूप शिवलिंग की पूजा करते हुए उनका बेलपत्र, भांग, धतूरा, दूध, दहीं, घी और गंगाजल से जलाभिषेक करते हैं। आइए जानते हैं महाशिवरात्रि का महत्व, शिवजी से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और संपूर्ण पूजा विधि।

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महाशिवरात्रि 2023 पूजा का शुभ मुहूर्त

mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला
आज महाशिवरात्रि का त्योहार है और इस दिन भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। महाशिवरात्रि पर पूरे दिन और रात भगवान शिव की पूजा का महत्व होता है। इस दिन शिवलिंग का अभिषेक करना बहुत ही शुभ और लाभदायी होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 18 फरवरी, शनिवार को रात 08 बजकर 05 मिनट से शुरू हो रही है। 19 फरवरी 2023 की शाम को 04 बजकर 21 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। 

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महाशिवरात्रि पर उज्जैन महाकाल में भस्म आरती और 21 लाख दीये जलाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड

आज पूरे देशभर में महाशिवरात्रि पर्व की धूम है। महाशिवरात्रि के त्योहार को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उत्सव रूप में मनाने की परंपरा है। आज उज्जैन में महाकाल में भस्म आरती की गई और महाकाल कॉरीडोर में पहली बार शिवरात्रि का मनाया जा रहा है। यहां पर एक साथ  शाम को 21 लाख दीये जलाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड की तैयारी है। आपको बता दें कि उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के कपाट सुबह 3 बजे से ही खोल दिए गए हैं। भस्म आरती के साथ महाशिवरात्रि मनाई जा रही है।

देश के शिवमंदिरों में महाशिवरात्रि की धूम

गुजरात में 31.5 फीट लंबा रुद्राक्ष का शिवलिंग बनाया गया

आज देशभर में महाशिवरात्रि का महापर्व मनाया जा रहा है। गुजरात के धर्मपुर में करीब 31 लाख रुद्राक्ष से 31.5 फीट लंबा रुद्राक्ष का शिवलिंग बनाया गया है।

चार पहर की महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त

mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला
रात्रि प्रथम प्रहर :  18 फरवरी शाम 6:21 मिनट से रात 9:31 तक
रात्रि द्वितीय प्रहर : 18 फरवरी रात 9: 31 मिनट से 12:41 मिनट तक
रात्रि तृतीय प्रहर : 18-19 फरवरी की रात 12:42 मिनट से 3: 51 मिनट तक
रात्रि चतुर्थ प्रहर :  मध्यरात्रि बाद 3:52 मिनट से सुबह 7:01 मिनट तक

महाशिवरात्रि पर ग्रहों का शुभ संयोग

आज हर-हर महादेव की गूंज है। पूरे देश में महाशिवरात्रि का त्योहार उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुबह तड़के मध्य प्रदेश के उज्जैन महाकाल के मंदिर में भस्म आरती की गई। आज महाशिवरात्रि पर ग्रहों को संयोग बना हुआ है जिसमें गुरु अपनी स्वयं की राशि मीन में हैं। शनि अपनी स्वयं की राशि कुंभ में मौजूद हैं जहां पर उनके साथ पिता सूर्य देव भी विराजमान हैं। शुक्र ग्रह भी मीन राशि में है और चंद्रमा कुंभ राशि में मौजूद हैं। ऐसे में महाशिवरात्रि पर ग्रहों का शुभ संयोग बना हुआ है। ऐसे में ग्रह दोषों से छुटकारा पाने के लिए महाशिवरात्रि पर पूजा करना शुभ होगा। 

महाशिवरात्रि पर सुबह से ही मंदिरों में भारी भीड़

महाशिवरात्रि पर राशि के अनुसार कैसे करें पूजा

मेष राशि: मेष राशि के जातकों को घी और शहद से शिवलिंग पर अभिषेक करना चाहिए।

वृषभ राशि: आज महाशिवरात्रि के मौके पर वृषभ राशि के जातकों को शिवरात्रि के दिन दूध, शहद  मिलाकर शिवजी का पूजन करना चाहिए। इससे सफलता प्राप्त हासिल होगी।

मिथुन राशि: मिथुन राशि के जातकों को शिवलिंग पर आज दूध,भांग और शक्कर से अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से रोगों से छुटकारा मिल जाएगा। 

कर्क, सिंह और कन्या राशि वाले आज ऐसे करें शिवलिंग का जलाभिषेक

कर्क राशि: आज कर्क राशि के जातकों को गंगाजल में केसर, दूध और शहद मिलाकर शिवलिंग पर अभिषेक करना चाहिए। विवाद होंगे खत्म।

सिंह राशि: सिंह राशि के जातकों को मुकदमें में विजय प्राप्त करने के लिए गन्ने का रस और नींबू मिलाकर शिवजी पर अर्पित करना चाहिए।

कन्या राशि : कन्या राशि के लोगों को शिवरात्रि के दिन घी, दही मिलाकर शिवलिंग पर अभिषेक करना चाहिए। इससे धन लाभ होगा। 

महाशिवरात्रि पर आज तुला, वृश्चिक और धनु राशि वाले ऐसे करें पूजा

तुला राशि: कार्यों में सफलता हासिल करने के लिए आज महाशिवरात्रि के मौके पर तुला राशि के जातकों को पंचामृत से शिवपूजन करना चाहिए। 

वृश्चिक राशि: संकटों से मुक्ति के लिए वृश्चिक राशि के लोगों को शिवरात्रि के दिन दूध, गाय का घी, शक्कर, केसर मिलाकर पूजन करें।

धनु राशि: संतान के सुख के लिए धनु राशि के जातकों को दही, शहद मिलाकर महादेव की पूजा करें।

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काशी विश्वनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि की आरती

मकर, कुंभ और मीन राशि वाले इस तरह से करें शिव उपासना

मकर राशि: मकर राशि के जातकों को आज शिवरात्रि के दिन दूध, गंगाजल और शक्कर से शिवजी की पूजा करनी चाहिए। 

कुंभ राशि: कुंभ राशि के लोगों को बेल के रस और जल से शिवपूजन करना चाहिए। ऐसा करने से प्रमोशन और धनलाभ की प्राप्ति होती है। 

मीन राशि: मीन राशि के जातक यदि मान-सम्मान में वृद्धि करना चाहते हैं तो शिवरात्रि के दिन गंगाजल, दूध और दही से पूजा करें। 

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Shivratri 2023: महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला
आज हर-हर महादेव के बोल के साथ पूरे देशभर में महाशिवरात्रि के त्योहार को बड़े ही धूम धाम के साथ मनाया जा रहा है। शिवपुराण के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था इसलिए हर साल महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। इसके अलावा महाशिवरात्रि की तिथि पर भगवान विष्णु और ब्रह्रााजी ने सबसे पहले शिवलिंग की पूजा की थी क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन शिवलिंग प्रकट हुए थे।

महाशिवरात्रि शुभकामना संदेश

महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala
काल भी तुम और महाकाल भी तुम
लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम
शिव भी तुम और सत्य भी तुम!
महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं।

अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चाण्डाल का
काल भी उसका क्या बिगाड़े
जो भक्त हो महाकाल का!
महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं !

MahaShivratri 2023: शिव-पार्वती के मिलन का प्रतीक है महाशिवरात्रि, मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए करें ये उपाय

mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि शुभकामना संदेश

महाशिवरात्रि वॉलपेपर 2023 - फोटो : amar ujala
महाशिवरात्रि शुभकामना संदेश

Mahashivratri: महाशिवरात्रि पर किस समय पूजा करना शुभ होता है?

mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला
आज शिव आराधना का सबसे बड़ा महापर्व शिवरात्रि पूरे देशभर में धूम-धाम के साथ मनाई जा रही है। महाशिवरात्रि पर भोलेभंडारी की पूजा वैसे तो पूरे दिन और रात दोनों ही समय किया जाता सकता है। शिव और लिंग पुराण के अनुसार रात में शिवलिंग का अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

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Mahashivratri:आज कैसे करें शिव आराधना ?

Happy Maha Shivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला
शिव भक्तों के लिए आज महाशिवरात्रि का पर्व बहुत ही खास है। अपने आराध्य देवता को प्रसन्न करने के लिए और अपनी हर मनोकामना को प्राप्त करने के लिए शिवजी की पूजा-उपासना जरूरी है। आज ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करते हुए शिवजी की पूजा करें। शिवमंत्रों का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर दूध, दही, जल, गंगाजल, शहद, गन्ने का रस, चंदन और भस्म से भगवान भोलेनाथ का श्रृंगार करें।

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Shivratri:आज भोलेभंडारी की पूजा करते समय इन बातों का रखें खास ध्यान

महाशिवरात्रि 2023 - फोटो : amar ujala
भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता है और इनकी पूजा बहुत ही सरल मानी गई है। भोलेनाथ को मात्र एक लोटे जल से प्रसन्न किया जा सकता है। लेकिन शिवजी की पूजा में कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

- शिवजी की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्तों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
- शिवजी की पूजा में शंख का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
- शिवजी को केतकी का फूल वर्जित माना गया है। 
- शिवजी को जब दूध या जल अर्पित करें तो उसका सेवन न करें बल्कि इसे प्रसाद के रूप में सिर और आंखों पर लगाएं।
- पूजा के बाद शिवलिंग की आधी ही परिक्रमा करें। 

Shivratri Shiv Ji Ki Aarti: महाशिवरात्रि पर पूजा के बाद शिव आरती जरूर करें

महाशिवरात्रि 2023 - फोटो : amar ujala
भगवान शिव की आरती

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।

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Mahashivratri 2023: इस बार महाशिवरात्रि और शनि प्रदोष का विशेष संयोग

आज महाशिवरात्रि और शनि प्रदोष व्रत दोनों का ही संयोग है। महाशिवरात्रि और प्रदोष व्रत दोनों ही महादेव को समर्पित होने वाला त्योहार है। प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि के संयोग से भगवान शिव की पूजा करना बहुत ही शुभ और लाभदायी रहेगा। 

Mahashivratri: भगवान शिवजी को बेलपत्र क्यों है प्रिय ?

बेलपत्र - फोटो : istock
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को बेलपत्र बहुत ही प्रिय होता है। बेलपत्र को भगवान महादेव के तीनों नेत्रों का प्रतीक माना गया है। शिवजी की पूजा में भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से व्यक्ति की हर तरह की सुख-समृद्धि और मनोकामना जरूर पूरी होती है। इस कारण से शिवजी की पूजा में बेलपत्र को शामिल किया जाता है।
 

Shivratri: भोलेभंडारी को क्यों चढ़ाते हैं भांग ?

भगवान भोलेनाथ को भांग और धतूरा अर्पित किया जाता है। दरअसल इसी पीछे धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव हर तरह के मन के विकार और बुराईयों को दूर करते हैं। इस कारण से भांग शिव जी को अर्पित की जाती है। वहीं भांग एक औषधि का काम भी करती है, जब भगवान शिव ने विषपान किया था तब इसके प्रभाव से भगवान का पूरा शरीर तपने लगा था। तब भगवान के इस ताप को कम करने के लिए भांग के पत्ते सभी देवी-देवताओं ने शिवजी पर चढ़ाए थे।

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Shivratri: भोलेनाथ को शमी पत्र भी प्रिय है 

शिवजी की पूजा-उपासना में शमी के पत्रे को भी शामिल किया जाता है। शमी के पत्ते शनिदेव को बहुत प्रिय है, लेकिन ये पत्ते शिवलिंग पर भी चढ़ाए जाते हैं। शिवलिंग पर अभिषेक करने के बाद शमी के पत्ते चढ़ाएं। ऐसा करने से भोलेनाथ के साथ-साथ शनिदेव की कृपा भी बनी रहेगी।

Mahashivratri: जानिए महाशिवरात्रि का महत्व 

शिवपुराण में महाशिवरात्रि व्रत का महत्व बताया गया है। इस दिन व्रत करने और भगवान शिव की पूजा और मंत्रों के जाप से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन भोलेनाथ की विधि-विधान के पूजा-अर्चना करें। शास्त्र के नियमों के अनुसार शिव मंत्रों का जाप करें।
 

Mahashivratri: महाशिवरात्रि पूजा विधि 2023

आज सबसे पहले स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हुए सूर्यदेव को जल अर्पित करें। फिर इसके बाद अपने घर के पास मंदिर जाकर शिवजी का दर्शन करके पूजा शुरू करें। पूजा में चन्दन, मोली ,पान, सुपारी,अक्षत, पंचामृत,बिल्वपत्र,धतूरा,फल-फूल,नारियल इत्यादि शिवजी को अर्पित करें। भगवान शिव को अत्यंत प्रिय बेल को धोकर चिकने भाग की ओर से चंदन लगाकर चढ़ाएं। 'ॐ नमः शिवाय' मन्त्र का उच्चारण जितनी बार हो सके करें। 

Mahashivratri: आज कैसे करें शिवलिंग का रुद्राभिषेक ?

हिंदू धर्म में भगवान शिव की कृपा पाने के लिए रुद्राभिषेक करने का विशेष महत्व होता है। शिललिंग का अभिषेक करते समय विशेष ध्यान रखना चाहिए।

- रुद्राभिषेक करते समय दिशा का ध्यान देना बहुत ही जरूर होता है। रुद्राभिषेक में भक्त का मुख पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए।
- सबसे पहले गंगाजल शिवलिंग को चढ़ाएं और अभिषेक करते हुए शिवजी के मंत्रों का लगातार जाप करें। 
- आपको अभिषेक के दौरान शिवजी के विभिन्न मंत्रों जैसे महामृत्युंजय मंत्र,  शिव तांडव स्तोत्र, रुद्र मंत्र और ऊं नम:शिवाय का जाप करें।
- गंगाजल से अभिषेक करने के बाद शिवलिंग पर गन्ने का रस, शहद ,दूध, दही और बेल पत्र अर्पित करें। 
- फिर इसके बाद शिवलिंग के ऊपर चंदन का लेप लगाएं और सभी तरह की पूजा चीजें चढ़ाएं।

Mahashivratri: शिवलिंग पर क्यों नहीं चढ़ाते तुलसी ?

आज भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-आराधना का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि मनाई जा रही है। भगवान शिव को जल, गंगाजल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, दूध, दही और घी अर्पित किया जाता है। लेकिन हिंदू धर्म में सबसे पवित्र चीज मानी जाने वाली तुलती को अर्पित करना वर्जित माना गया है। आखिर क्यों ?  इसके पीछे वजह है कि भगवान शिव ने तुलती के पति शंखचूड़ राक्षस का वध कर दिया था इस कारण से शिवजी की पूजा में तुलती के पत्ते नहीं अर्पित करते हैं। 

Mahashivratri: भगवान शिव के हाथों में क्यों है त्रिशूल और डमरू

भगवान शिव जी का स्वरूप बहुत ही निराला और अनोखा है। शिवजी के श्रृंगार में त्रिशूल का विशिष्ट स्थान है। त्रिशूल प्रतीक है भौतिक,दैविक और आध्यात्मिक धाराओं का और साथ ही साथ शक्ति का भी। त्रिशूल के तीन शूल क्रमशः सत,रज और तम गुण से प्रभावित भूत,भविष्य और वर्तमान का द्योतक हैं।त्रिशूल के माध्यम से युग-युगांतर में सृष्टि के विरुद्ध सोचने वाले राक्षसों का संहार किया है।  डमरू उस अनहद नाद का घोतक है जिसकी आकांक्षा सभी को रहती है।

 

Mahashivratri: महाशिवरात्रि व्रत के पारण का मुहूर्त 

महाशिवरात्रि व्रत पारण का मुहूर्त कल यानी 19 फरवरी 2023 को सुबह 6 बजकर 57 मिनट से शाम 3 बजकर 25 मिनट तक रहेगा।
 

Shivratri: महाशिवरात्रि 2023 पूजा सामग्री

  • शिव जी की तस्वीर या छोटा शिवलिंग, बेलपत्र
  • भांग
  • धतूरा
  • मदार पुष्प, फूलों की माला
  • शमी के पत्ते
  • कमल और सफेद फूल
  • गंगाजल, महादेव के लिए वस्त्र
  • गाय का दूध, दही, शक्कर
  • जनेऊ, चंदन, केसर, अक्षत्

भगवान शिव की आराधना प्रदोषवेला में करना शुभ 

भगवान शिव की चतुर्दशी तिथि और प्रदोष काल में पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शिवरात्रि हर माह के कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है किन्तु फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। भगवान शिवजी की पूजा-आराधना प्रदोषकाल में करना बहुत ही शुभ माना जाता है। त्रयोदशी तिथि का अंत और चतुर्दशी तिथि के आरम्भ का संधिकाल ही इनकी परम अवधि है। सुबह और शाम के संधिकाल को प्रदोषकाल कहा जाता है।
 

महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जाप

शिव पुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र या शिव के पंचाक्षर मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप इस दिन करना चाहिए। साथ ही महाशिवरात्रि के दिन रात्रि जागरण का भी विधान है।

 महाशिवरात्रि पर क्या हैं मान्यताएं

माना जाता है कि जब कुछ नहीं था अर्थात सृष्टि के आरंभ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान ब्रह्मा के शरीर से भगवान शंकर रुद्र रुप में प्रकट हुए थे। कई स्थानों पर यह भी माना जाता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह भी इसी दिन हुआ था। इसलिये महाशिवरात्रि हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों एवं भगवान शिव के उपासकों का एक मुख्य त्योहार है। ऐसा भी माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने, व्रत रखने और रात्रि जागरण करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं एवं उपासक के हृद्य को पवित्र करते हैं। मान्यता यह भी है कि इस दिन भगवान शिव की सेवा में दान-पुण्य करने व शिव उपासना से उपासक को मोक्ष मिलता है। 

Mahashivratri: महाशिवरात्रि पर सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में होती है भारी भीड़

आज महाशिवरात्रि के अवसर पर देश के सभी मंदिरों में भारी भीड़ एकत्रित हुई है। जिसमें से शिव जी के 12 ज्योतिर्लिंगों में खास तरह का पूजा-पाठ का आयोजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव इन सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में स्वयं महादेव ज्योति पुंज के रूप में विराजमान है। ये 12 ज्योतिर्लिंगों इस प्रकार है। सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारेश्वर, भीमाशंकर, विश्वेश्वर (विश्वनाथ), त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वर, घुष्मेश्वर।

Mahashivratri: शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में अंतर

शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि बहुत ही प्रिय होती है। इस कारण से हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि मासिक शिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। लेकिन फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है इस दिन शिवलिंग प्रगट हुआ और भगवान शिव संग माता पार्वती का विवाह हुआ था। 

 

Mahashivratri: महाशिवरात्रि के उपाय

जीवन में यश और समृद्धि के लिए आज महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर गन्ने के रस और घी से अभिषेक करें। 
 

महाशिवरात्रि पर करें पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ

शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम्
 
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम:शिवाय॥1॥

मंदाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथ महेश्वराय।
मण्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नम:शिवाय॥2॥

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्दसूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।
श्रीनीलकण्ठाय बृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नम:शिवाय॥3॥

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नम:शिवाय॥4॥

यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नम:शिवाय॥5॥

पञ्चाक्षरिमदं पुण्यं य: पठेच्छिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥6॥

महाशिवरात्रि में मनोकामनापूर्ति के लिए बनाएं ये शिवलिंग

दही से बना शिवलिंग: दही निर्मित शिवलिंग की पूजा करने से धन, यश की प्राप्ति होगी। 
पीतल या कांसा के शिवलिंग: कांसा या पीतल के निर्मित शिवलिंग की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। 
पार्थिव(मिट्टी) शिवलिंग: पार्थिव शिवलिंग बना के पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है। 
गुड़ से बने शिवलिंग:  इस प्रकार की शिवलिंग की पूजा करने से प्रेम संबंध प्रगाढ़ होते हैं। 
जौ या चावल या आटे से निर्मित शिवलिंग: इसका निर्माण करके पूजा करने से वैवाहिक रिश्ते सुख समृद्ध होंगे। 
भस्म से बना शिवलिंग: भस्म निर्मित शिवलिंग का निर्माण कर पूजा करने से सभी सुखों की प्राप्ति होती है। 

महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ को न चढ़ाएं ये  फूल

महाशिवरात्रि में भगवान भोलेनाथ की चारों प्रहर पर पूजा की जाएगी। लेकिन शिव जी की पूजा के दौरान उन्हें कुछ विशेष पुष्प अर्पित नहीं करने चाहिए। केतकी के फूलों के बारे में सब जानते हैं। इसके अलावा भी शिवजी की पूजा में  पत्रकंटक, गंभारी, बहेड़ा, तिंतिणी, गाजर, कैथ, कोष्ठ, धव,मंदती, केवड़ा, जूही, कुंद, शिरीष, कंद, अनार, कदंब, सेमल, सारहीन, और कपास के फूल भी नहीं चढ़ाएं चाहिए। 
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शिवलिंग परिक्रमा के दौरान करें इन नियमों का पालन

  • शिवलिंग की परिक्रमा को लेकर कुछ विशेष नियम हैं। 
  • शिवलिंग की आधी परिक्रमा की जाती है। 
  • आधी परिक्रमा कर वापस आधी परिक्रमा करनी चाहिए। 
  • शिवलिंग की परिक्रमा करते समय दिशा का भी ध्यान रखें। 
  • शिवलिंग की परिक्रमा बाईं ओर से की जाती है। 
  • परिक्रमा करते समय कभी भी जलाधारी नहीं लांघनी चाहिए। 
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