अहोई अष्टमी पर क्या है आज पूजा का शुभ मुहूर्त
ahoi ashtami 2021 shubh muhurat: अहोई अष्टमी की पूजा में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। इसमें शाम के समय जब आसमान में तारे निकलने ही वाले होते हैं तब पूजा आरंभ हो जाती है। आज अहाई अष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त शाम बजकर 40 मिनट से 06 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।
आज अहोई अष्टमी पर पूजा के लिए इतना मिलेगा समय
संतान का सुख-समृद्धि और मंगलाकामना के लिए रखा जाने वाला अहोई अष्टमी का व्रत बहुत कठिन माना जाता है। अहोई अष्टमी की पूजा के लिए आज कुल मिलाकर 01 घंटा 17 मिनट का समय मिलेगा। शाम के समय तारों के दर्शन के लिए सांझ का समय 06 बजकर 03 मिनट है वहीं अहोई अष्टमी की शाम को चंद्रोदय का समय रात को 11 बजकर 29 मिनट का है।
जानिए अहोई अष्टमी की पूजन सामग्री
अहोई अष्टमी का व्रत एक तरह से करवा चौथ के व्रत जैसा ही किया जाता है। सुबह से माताएं निर्जला व्रत रखते हुए शाम के समय तारों को देखने के बाद व्रत का पारण करती हैं। अहोई अष्टमी की पूजा के लिए इन पूजा सामग्रियों की जरूरत होती है- अहोई माता की मूर्ति या फोटो, करवा, पानी का कलश, फूल और माला, दीपक , रोली ,दूब, श्रृंगार का सारा सामान, बयाना, सिंघाड़े, फल,खीर आदि।
अहोई अष्टमी पर शाम होते ही शुरू हो जाती है अहोई माता का पूजा
अहोई अष्टमी पर जैसे ही धीरे-धीरे शाम होने लगती है और आकाश में तारे निकलने का क्रम शुरू होता है अहोई माता की पूजा आरंभ हो जाती है। इसमें माताएं दिन भर व्रत रखते हुए तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं।
अहोई अष्टमी पर करें इस मंत्र का जाप
अहोई अष्टमी के दिन सुबह से व्रत का संकल्प लेने के बाद लगातार ॐ पार्वतीप्रियनंदनाय नमः मंत्र का जाप करना बहुत ही उपयोगी होता है।
पढ़ें अहोई अष्टमी व्रत कथा
Ahoi Ashtami 2021 Vrat Katha: अहोई अष्टमी व्रत का उपवास रखने के साथ अहोई माता की कथा सुनना काफी फलदायक रहता है। आइए जानते हैं अहोई अष्टमी व्रत कथा-
एक साहूकार के सात बेटे और एक विमला नाम की बेटी थी सबकी शादी हो चुकी थी। विमला दीपावली को पिता के घर आई थी। घर को लीपने के लिए सातों बहुएं मिट्टी लाने गावं के बाहर गईं तो विमला भी उनके साथ चली गई। विमला जहां खुदाई रही थी, उस स्थान पर एक सेही अपने साथ बेटों से साथ रहती थी। मिट्टी काटते हुए गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी के चोट से स्याहु का एक बच्चा मर गया इस पर क्रोधित होकर सेही ने विमला को संतानहीनता का श्राप दे दिया। सेही के वचन सुनकर विमला अपनी सातों भाभियों से एक-एक कर विनती करती हैं कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें। सबसे छोटी भाभी पुष्पा ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है। इसके बाद पुष्पा के जो भी बच्चे जन्म लेते हैं वे सात दिन बाद मर जाते हैं। सात पुत्रों की इस प्रकार मृत्यु होने के बाद पुष्पा एक पंडित जी घर गयी और सारी व्यथा बताई। पंडित ने सुरभी गाय की सेवा करने की सलाह दी। सुरभी सेवा से प्रसन्न होकर सेही पास ले जाती है। रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगते हैं। अचानक साहूकार की छोटी बहू पुष्पा की नजर एक ओर जाती हैं, वह देखती है कि एक सांप गरूड़पक्षी के बच्चे को मार रहा है तो वह सांप को ही मार देती है। इतने में गरूड़पक्षी की माँ भी वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहू पुष्पा ने उसके बच्चे को मार दिया है इस पर वह पुष्पा को चोंच मारने लगती है। पुष्पा गरुण की माँ से कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है इसपर गरूड़पक्षी की माँ पुष्पा से खुश होकर सुरभी सहित उन्हें सेही के पास पहुंचा देती है। सेही पुष्पा की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहू होने का आशीर्वाद देती है। सेही के आशीर्वाद से छोटी बहू का घर पुत्र और पुत्र बहुओं से हरा भरा हो जाता है। असंभव को भी संभव करदेना ही अहोई माँ की शक्ति है।
अहोई अष्टमी की पूजा में न करें ये काम
अहोई अष्टमी पर अहोई माता की पूजा-आराधना शाम के समय जैसे ही तारे निकलने लगते हैं आरंभ हो जाती है। लेकिन माताएं अहोई देवी की पूजा करने से पहले कुछ कार्यों को नहीं करना चाहिए।
1- व्रत वाले दिन पर माताएं भूलकर भी नुकीली चीजों का प्रयोग न करें।
2- व्रत के दिन घर और बगीचों में खुरपी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
3- उपवास के दौरान महिलाएं काले और नीले रंग के कपड़े न पहनें।
4- घर पर इस दिन प्याज और लहसुन का प्रयोग न करें।
5- पूजा से पहले भगवान गणेश की आराधना जरूर करें।
अहोई अष्टमी पर गुरु-पुष्य नक्षत्र का संयोग
संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की मनोकामना के लिए कार्तिक माह की अष्टमी तिथि पर रखा जाने वाला अहोई अष्टमी के दिन गुरु-पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। गुरु-पुष्य नक्षत्र में खरीदारी और नया कार्य आरंभ किया जाता है।
दिवाली से पहले क्यों रखा जाता है अहोई अष्टमी का व्रत
अहोई अष्टमी का व्रत हर वर्ष दिवाली के कुछ दिन पहले ही मनाया जाता है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की खुशहाली की कामना के लिए रखती हैं। अहोई अष्टमी का व्रत सूर्योदय से लेकर शाम तक जिसे गोधूलि बेला भी कहा जाता है महिलाएं रखती हैं। दिनभर उपवास और मंत्रों के जाप के बाद शाम के समय आकाश में तारों के दर्शन करने के बाद व्रत तोड़ा जाता है। वहीं कुछ महिलाएं चांद के दर्शन करने के बाद भी उपवास तोड़ती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार संतान के सुखी जीवन और जिन महिलाओं की संताने नहीं होती उसकी प्राप्ति के लिए अहोई अष्टमी व्रत करने का विधान होता है।
आज शाम कब है अहोई अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
Ahoi Ashtami 2021 Puja Vidhi Shubh Muhurat: अहोई अष्टमी व्रत में शाम के समय पूजा का विधान होता है। 28 अक्तूबर 2021 की शाम 5 बजकर 40 मिनट से 06 बजकर 56 मिनट तक अहोई अष्टमी का शुभ मुहूर्त है।
अहोई मां की आरती
Ahoi Ashtami 2021 Aarti Ahoi Mata Ki Aarti: कोई भी पूजा बिना आरती के संपन्न नहीं मानी जाती है। ऐसे में आज अहोई अष्टमी के त्योहार के मौके पर पूजा करते समय अहोई माता की आरती जरूर करनी करें...
अहोई मां की आरती
जय अहोई माता, जय अहोई माता!
तुमको निसदिन ध्यावत हर विष्णु विधाता।
ब्राहमणी, रुद्राणी, कमला तू ही है जगमाता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता।। जय।।
माता रूप निरंजन सुख-सम्पत्ति दाता।।
जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता।। जय।।
तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता।
कर्म-प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता।। जय।।
जिस घर थारो वासा वाहि में गुण आता।।
कर न सके सोई कर ले मन नहीं धड़काता।। जय।।
तुम बिन सुख न होवे न कोई पुत्र पाता।
खान-पान का वैभव तुम बिन नहीं आता।। जय।।
शुभ गुण सुंदर युक्ता क्षीर निधि जाता।
रतन चतुर्दश तोकू कोई नहीं पाता।। जय।।
श्री अहोई माँ की आरती जो कोई गाता।
उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता।। जय।।
कुछ ही देर बाद शुरू होगी अहोई अष्टमी की पूजा
अहोई अष्टमी 2021: Ahoi Ashtami Puja Muhurat 2021
अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त – शाम 05 बजकर 40 मिनट से लेकर 06 बजकर 56 मिनट तक
तारों को देखने का समय – 06:02
अहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय समय – 11:28