ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों का विकास धीरे-धीरे होता है। आमतौर पर ऐसे बच्चों को उदासीन माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में ये लोग अद्भुत प्रतिभा वाले भी होते हैं।
दो अप्रैल को 'विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस' था। ऑटिज्म मानसिक और विकास से संबंधित एक गंभीर समस्या है। इसके लक्षण जन्म से लेकर तीन वर्ष की आयु के बाद नजर आने लगते हैं। इसमें बच्चे का मानसिक विकास रुक जाता है। इससे ग्रस्त बच्चों में व्यवहार से लेकर कई तरह की समस्याएं देखी जा सकती हैं।
वे सामाजिक रूप से अलग-थलग रहते हैं। जल्दी किसी से घुलते-मिलते नहीं हैं और दूसरों से बात करने से भी हिचकते हैं। ऑटिज्म की समस्या लड़कियों से ज्यादा लड़कों में होती है। हालांकि, जितनी जल्दी इलाज शुरू हो जाए, उतने ही सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, आनुवांशिक, सेंट्रल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचने, यहां तक कि गर्भावस्था के दौरान खानपान सही न होने से भी यह समस्या हो सकती है। इसके लक्षणों में बोलचाल व शाब्दिक भाषा में कमी आना, शब्दों को बार-बार बोलना, आंखों में आंखें डालकर बात करने से घबराना, डर लगना, अकेले रहना पसंद करना आदि शामिल हैं।
आप खुद से भी बच्चे को इस समस्या से उबरने में मदद कर सकते हैं। इसक लिए बच्चे को शारीरिक खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। खेल-खेल में उन्हें नए शब्द सिखाएं। छोटे वाक्यों में बात करें। बच्चे को तनावमुक्त रखें। समस्या बढ़ने पर मनोचिकित्सक से मिलें।