प्यार में धोखे की कहानी
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पता ही नहीं चला कि मेरे मन के भीतर वह एक नायक की भूमिका में कब बस गया? बाकी लड़कों से एकदम अलग लगने लगा। मैं अपनी हर छोटी-छोटी बातें शेयर करने लगी। एक दिन भी बात नहीं होती तो मेरे भीतर निराशा का भाव जागने लगता। अंदर से न जाने कैसी बिजली कौंध उठती कि मैं आतुर हो उठती बात करने और मिलने के लिए।
इस तरह मैं उसके साथ घंटों बिताने लगी। पता ही नहीं चला कब कॉलेज में उसका आखिरी साल आ गया। अभी आपके सामने उसकी बात कर रही हूं तो एक क्रूर गुंडे की तरह उसका चेहरा मेरे आंखों के आगे उभर आ रहा है जबकि उस वक्त ये ही वही चेहरा था जो मुझे बाकी सभी चेहरों से एकदम अलग और मासूम लगता था।
खैर, यादें काफी लंबी हैं। साल 2013 था हम रांझणा फिल्म देखकर लौट रहे थे। कोमल (बदला नाम) भी साथ थी। हम हॉस्टल न जाकर सीधे उसके कमरे पर चले गए। यह कोमल का ही प्लान था और मुझे भी कोई आपत्ति नहीं थी। खाना बाहर से ही पैक कराकर लाए थे।
ड्रिंक, खूब बातचीत और खाना खाने के बाद कोमल दूसरे कमरे में सोने चली गई। अब मैं और वो ही साथ थे। मैं उसकी बाहों में न जाने कितने सपने देखने लगी? वो कुछ और ही चाहता था और मैं तैयार नहीं थी। मैंने ऐसा कुछ सोचा भी नहीं था। इसलिए.. जब उसकी छेड़खानी बढ़ने लगी तो मैं एकदम से गुस्सा हो गई और कोमल के साथ दूसरे रूम में जाने लगी। उसको यह बात इतनी नागवार गुजरी की वो झटके से बौखला गया। उसने मेरे पूरे शरीर को झकझोरते हुए मुझे वापस खींच लिया और जोरों से एक चाटा जड़ दिया।
आंखों से बस आंसू ही बहते रहे। कुछ समझ में नहीं आया। दिमाग सन्न रह गया था। बिस्तर पर वो मेरे शरीर को नोंच रहा था और मैं बेजान और बेसुध पड़ी थी। एक मन होता जोर से चिल्लाऊं, खूब रोऊं और कोई भारी चीज उसके सिर में मारकर कोमल के पास चली जाऊं।
मैं अंदर से टूट गई थी और उसे बस अपनी भूख मिटानी थी। मेरे आंसू, बेसुध पड़ा शरीर और सिसकियां उसे किसी चीज से मतलब नहीं था। उस रात तीन बजे तक मैं रोती रही और उसने एक बार भी मुझे नहीं मनाया। उल्टा वो बिस्तर पर सो रहा था।
अगले दिन मैंने कोमल को सारी बातें बताई, उसने जो बोला मुझे अपने कानों पर यकीन ही नहीं हुआ। उसका कहना था रिलेशनशिप में यह आम बात है। भूल जाऊं। एक हफ्ते तक मैं इतना गुस्सा थी कि उसकी शक्ल भी देखना नहीं चाहती थी, लेकिन घर में कोमल, फोन और मैसेज में उसका भोलापन, माफी के मैसेज और बार-बार फोन। पता नहीं क्या हुआ- मैं उससे अपने रिलेशनशिप को खत्म नहीं कर पाई।
कई बार ऐसा ही हुआ। वैसे वह सामान्य रहता, लेकिन जब उसका मन शारीरिक संबंध बनाने का होता, वह खूंखार में तब्दील हो जाता। हाथ उठाने से भी गुरेज नहीं करता। गालियां देने लगता। ऐसा ही चलता रहा और वो दिन भी आ गया जब कॉलेज में उसकी विदाई की पार्टी थी। उस दिन भी उने वैसा ही किया जैसे राझणा फिल्म देखने के बाद। (मैं पूरी घटना बताना नहीं चाहती )। इसके बाद मैंने उससे दूरी बना ली। वो कई-कई फोन करता, मैं कम का ही जवाब देती। मुझे उससे नफरत हो गई थी। कॉलेज खत्म हुआ मैं दिल्ली आ गई और यहां एक प्राइवेट कंपनी में काम करने लगी।
फिर मेरी उससे कोमल की शादी में मुलाकात हुई। शादी मुंबई में थी और वह भी आया था। उसके और मेरे बीच दूरी थी, लेकिन वह ऐसा दिखा रहा था जैसे उसकी कोई गलती न हो, बेहद भोला हो। मैं उसकी शक्ल भी देखना नहीं चाहती थी लेकिन दोस्तों के बीच बेमन से उसकी बातों का जवाब दे रही थी।
अचानक फेरों के वक्त वह मेरे करीब आ गया और उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। उसका स्पर्श होते ही मैं अंदर तक हिल गई। पूरा शरीर मानो पसीना-पसीना होने लगा। मैंने उसके हाथ को झटका और वहां से दूर हो गई। वह मुस्काराता रहा था। उसकी शक्ल अभी भी भोली लग रही थी लेकिन अंदर से वो किसी जानवर से कम नहीं था जो सिर्फ शरीर का भूखा हो।
( स्वाति (बदला हुआ नाम) की फीचर डेस्क से बातचीत पर आधारित। )