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सफेद दाग को कोढ़ न समझें, पहचानें इसके लक्षण

Fri, 26 Oct 2012 06:36 PM IST
नई दिल्ली/प्रियंका पांडेय पाडलीकर
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काफी दिनों से रोहन अपनी ठुड्डी पर कुछ अजीब सा बदलाव महसूस कर रहा था। ठुड्डी पर एक छोटा सा दाग जिसका रंग उसकी त्वचा के रंग से थोड़ा हल्का नजर आता था। शुरू-शुरू में तो उसने इस दाग की परवाह नहीं की लेकिन धीरे-धीरे उसका दाग फैलने लगा तो उसके घरवाले इस बात से घबरा गए कि कहीं यह दाग कुष्ट रोग की निशानी तो नहीं। तब उन्होंने चिकित्सक से संपर्क किया और उन्हें पता चला कि यह ल्यूकोडरमा नामक चर्मरोग के लक्षण हैं।
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रोहन व उसके परिवारवालों जैसे कई लोग हैं जो अक्सर सफेद दाग को कुष्ट रोग समझने की गलती कर बैठते हैं जबकि सफेद दाग एक चर्म रोग हो सकता है जिसके बारे में जानकारी जरूरी है। अगर आप भी सफेद दाग या पैच से संबंधित किसी समस्या से परेशान हैं या इस बारे में कोई जानकारी चाहते हैं तो हम आपको चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. नवीन तनेजा (डायरेक्टर, द नेशनल स्किन सेंटर) से बातचीत के आधार इस बारे में जानकारी दे रहे हैं।

कोढ़ नहीं है सफेद दाग
त्वचा पर सफेद दाग की समस्या है तो इसे कोढ़ (लैप्रोसी) समझने की भूल न करें। हालांकि कोढ़ की शुरुआत में भी त्वचा पर सफेद दाग होते हैं लेकिन वे छूने से संक्रमित नहीं होते हैं। वो सफेद दाग एक प्रकार का चर्म रोग है।  
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क्यों होता है सफेद दाग
त्वचा पर सफेद दाग या सफेद चकतों के पीछे तीन कारण हो सकते हैं- पोषक तत्वों की कमी, फंगल संक्रमण या फिर ल्यूकोडरमा (विटिलिगो) नामक चर्म रोग। आमतौर पर इनमें से ही किसी एक समस्या की वजह से त्वचा सफेद दाग या पैच हो जाते हैं जिनकी अगर सही समय पर जाँच हो, तो 100 प्रतिशत इलाज संभव है।

पोषक तत्वों की कमी
कई बार शरीर में जरूरी मात्रा में विटामिन्स व मिनिरल्स की कमी से भी सफेद दाग की समस्या हो जाती है। संतुलित डाइट न लेने की वजह से शरीर की त्वचा के रंग से थोड़े हल्के रंग के दाग हो सकते हैं। ये दाग पूरी तरह सफेद नहीं दिखते। इसके उपचार के दौरान चिकित्सा के साथ-साथ हेल्दी डाइट पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है।

फंगल संक्रमण से सफेद दाग
कई बार किसी फंगल संक्रमण के परिणामस्वरूप भी त्वचा पर सफेद दाग की समस्या होती है। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय परामर्श बहुत जरूरी होता है जिसके बाद यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाती है। अक्सर इसके अलाज में दो से तीन महीने तक का समय लग जाता है।

ल्यूकोडरमा या विटिलिगो
ल्यूकोडरमा या विटिलिगो आज बेहद आम समस्या है जिसके कारणों का पूरी तरह पता नहीं चल सका है। फिर भी चिकित्सा द्वारा इसे नियंत्रित किया जा सकता है। कई बार यह जेनेटिकल कारणों से भी हो सकती है। इस रोग में त्वचा पर दूधिया रंग के चकत्ते या सफेद दाग निकल आते हैं। हो सकता है कि आगे चलकर ये दाग शरीर में फैलने भी लगें पर ये छूने से दूसरों को संक्रमित नहीं होते हैं। इसकी चिकित्सा के लिए दवाओं के साथ-साथ की बार एक्जाइमर लाइट सेशन या स्किन ड्राफ्टिंग टेकनीक जैसी विधियों की भी मदद ली जाती है।  

यह एक प्रकार का चर्म रोग है जिससे शरीर के किसी अंदरूनी हिस्से को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचता और यूरोपीय देशों में इतना आम है कि वहां इसे रोग की श्रेणी में भी नहीं माना जाता है। चिकित्सा के दौरान डॉक्टर रोगी को अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से बचने की सलाह देते हैं। कई बार एक से डेढ़ साल तक की अवधि में यह बीमारी ठीक हो जाती है जबकि कुछ मामलों में जरूरी नहीं है कि यह ठीक भी हो।
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