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टिफिन में खाना खाते है तो जरूर रखें ध्यान

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लंच बॉक्स का खाना हेल्दी हो, इस बात का ध्यान तो हम अक्सर रखते हैं। लेकिन जिस बॉक्स में हम अपना हेल्दी खाना पैक करते हैं, उस बॉक्स का हेल्दी होना भी तो जरूरी है। खासकर तब, जब आप प्लास्टिक का लंच बॉक्स यूज कर रही हों।
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लंच बॉक्स यानी टिफिन, आज हर घर की जरूरत बन गए हैं। बच्चों का स्कूल हो या पति का ऑफिस, एक सुंदर और टिकाऊ लंच बॉक्स तो हर किसी को चाहिए। लोगों की जरूरत को देखते हुए बाजार में लंच बॉक्स की सैकड़ों वैरायटी उपलब्ध हैं।

एक छोटे से लोकल मार्केट में भी चले जाइए, वहां आपको एक-से-बढ़कर एक लंच बॉक्स नजर आएंगे। हालांकि इसमें से ज्यादातर बॉक्स प्लास्टिक के ही होंगे और स्टील दूसरे नंबर पर।
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अब जहां टिफिन की इतनी सारी वैरायटी मौजूद हो, तो इसमें से सही और हेल्दी लंच बॉक्स लेना किसी चुनौती से कम नहीं है। खासकर जब बच्चों के लिए इसे खरीदना हो।

यहां सिर्फ रंग और डिजाइन पर ही नजर नहीं रखें, बल्कि टिफिन की क्वालिटी पर भी नजर रखना जरूरी है, तभी आप अपने परिवार के लिए सही लंच बॉक्स खरीद पाएंगी। वैसे बाजार में मिल्टन, एरिस्टो, सेलो, टपरवेयर, जिपलॉक जैसे कई ब्रांडेड
और नॉन ब्रांडेड लंच बॉक्स हैं। मगर इनमें से सही और सुविधाजनक लंच बॉक्स कौन-सा है, यह जानना जरूरी है।

इस समय बाजार में सब कुछ थीम बेस्ड आने लगा है। इसमें लंच बॉक्स के साथ-साथ बैग, पेंसिल बॉक्स, वाटर बोतल आदि सभी चीजें थीम बेस्ड हैं, जैसे कार्टून थीम में एंग्री बर्ड, बेनटेन, छोटा भीम, डोरेमोन, बार्बी, स्पाइडरमैन आदि।

क्या ध्यान रखें

प्लास्टिक के लंच बॉक्स या वाटर बॉटल के तल में आपने भी कुछ निशान देखें होंगे। लेकिन कभी इसके बारे में गहनता से जानने की कोशिश नहीं की होगी। दरअसल, ये निशान लंच बॉक्स की सेहत बताते हैं। अतः लंच बॉक्स की खरीदारी करते समय इन निशानों को जरूर देखें।

ग्लास और फोर्कः यह खाद्य पदार्थों के लिए सुरक्षित है।

रेडिएशन: यह माइक्रोवेव के लिए सुरक्षित है।

स्नोफ्लेक का निशान: यह फ्रीजर के लिए सुरक्षित है।

त्रिकोन के अंदर सात और पीपी लिखा: यह खाने पीने के सामानों के लिए सुरक्षित है। खासकर प्लास्टिक से बने लंच बॉक्स कुछ ज्यादा ही ट्रेंडी हैं। अब जब प्लास्टिक युग है, तो इसके असर से बच पाना मुश्किल है। फिर भी थोड़ी सावधानी बरतकर आप सही लंच बॉक्‍स्‍ा अपने नन्‍हे के लिए तो ले ही सकती हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

अधिकतर लोग बिना फूड ग्रेड मार्क देखे ही फैंसी लंच बॉक्स, पानी की बोतलें, प्लास्टिक के छोटे कंटेनर आदि खरीद लेते हैं। बच्चों को इन्हीं लंच बॉक्‍स में खाना देते हैं, जो सेहत के लिहाज से हानिकारक है।

दरअसल, प्लास्टिक के कंटेनर बनाने के उपयोग में लिया जाने वाला `बाइसफेनोल ए’ यानी बीपीए संचार प्रणाली और न्यूरोन्‍स पर विपरीत असर डालता है।

इससे इंसान की समझने व याद रखने की शक्ति भी क्षीण हो सकती है। श्रीबालाजी एक्‍शन मेडिकल इंस्टीट्यूट की डायटीशियन डॉ. प्रिया वर्मा कहती हैं, `बिना फूड ग्रेड सर्टिफिकेट वाले प्लास्टिक के बोतल या लंच बॉक्स से केमिकल का रिसाव होता है, जो बच्चों ही नहीं बड़ों के लिए भी बेहद हानिकारक है, क्योंकि प्लास्टिक एक खतरनाक न्यूरोटॉक्सिन है। इससे निकलने वाला केमिकल हार्मोन सिस्टम को असंतुलित कर कई बीमारियों का कारण बन सकता है।

इसका असर बच्चों के नर्वस सिस्टम व ब्रेन डेवलपमेंट पर भी हो सकता है। लर्निंग डिसबिलिटीज, अटेंशन की कमी, ब्रेस्ट कैंसर आदि का कारण भी हो सकता है प्लास्टिक। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।

इसलिए बच्चों पर किसी भी रसायन का प्रभाव अधिक पड़ता है। इसलिए प्लास्टिक के लंच बॉक्स को छोड़ दें, तो बेहतर हागा। अगर प्लास्टिक का लंच बॉक्‍स लेना भी हो, तो बच्चों को हमेशा अच्छी क्वालिटी वाले ही लंच बॉक्स दें। 

सबसे अच्छा लांच बॉक्स वही है, जो नॉन-टॉक्सिस हो। पीवीसी, बीपीए और लेड फ्री हो। बहुत से मुलायम लंच बॉक्स पीवीसी से बने होते हैं, जिससे नुकसानदेह केमिकल डाइऑक्सिन का रिसाव होता है, इससे दूर रहें।

साफ-सफाई की बात

प्‍लास्‍टिक अपने आसपास की चीजों की महक को खुद में समा लेता है, जो धोने के बाद भी जल्दी नहीं जाता। इस बदबू या जमी चिकनाई को दूर करने के लिए ये फॉर्मूला अपनाएं।

बदबू हटाने के लिए लंच बॉक्‍स को धोकर कुछ देर के लिए धूप में रखें या इसे गरम पानी में साबुन मिलाकर धोएं। फिर डिब्‍बे को सुखाकर, उसमें पुराना अखबार भर दें और डिब्‍बा बंद कर दें। इस्तेमाल में लाने से पहले डिब्‍बे से अखबार निकालकर उसे साफ पानी से धो लें।

महक हटाने के लिए आप सिरके का भी यूज कर सकती हैं। सिरके को पानी के साथ मिक्‍स करके बॉक्स में डालकर ढक्‍कन बंद कर दें। कुछ देर के बाद उसे साफ कर लें।

बेकिंग सोडा से भी बॉक्स को साफ कर सकती हैं। इससे जिद्दी दाग भी छूट जाते हैं। नींबू के छिलके से लंच बॉक्स को साफ कर सकती हैं। इससे दाग हल्‍का हो जाता है और बदबू भी दूर हो जाती है।
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टिफिन का सफर

क्या कभी आपने सोचा है कि लंच बॉक्स की शुरुआत कैसे हुई होगी? दरअसल, लंच बॉक्स का कॉन्सेप्ट अमेरिकी देशों से आया है।

तब छोटे स्तर के कर्मचारी रूमाल या कपड़े में बांधकर कार्यस्‍थल पर लंच ले जाया करते थे। जिनकी स्थिति थोड़ी ठीक थी, वे लकड़ी और बेत के बने बास्केट में खाना कैरी करते थे। इसके बाद टिन के लंच बॉक्स यूज होने लगे। यह दौर था 1860 का। वुडेन बॉक्स का चलन भी 19वीं शताब्दी में रहा।

फिर 1904 में वैक्यूम फ्लास्क थरमस के तर्ज पर ही लंच बॉक्स ईजाद की गई, जिसमें खाने को काफी देर तक गर्म रखा जा सकता था। फिर 1935 में पहला कैरेक्टर लंच बॉक्स बाजार में आया, जो था मिकी माउस।

ओवल शेप वाले इस बॉक्स को बनाया गया था टिन से, जिसमें हैंडल लगे हुए थे। इसके बाद 1950 में अलादिन इंडस्ट्रीज ने एक टेलीविजन शो (Hopalong Cassidy) पर बेस्ड बच्चों के लिए लंच बॉक्स बनाया, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया और तब 600,000 लंच बॉक्स बिक गए थे।

इसके बाद 1954 में एल्युमिनियम और टिन के और भी लंच बॉक्‍स पेश किए गए, जो ज्यादा टिकाऊ थे। इसके बाद प्लास्टिक और विनाइल के बने लंच बॉक्स लोगों ने यूज करना शुरू कर दिए।

सबसे पहले लंच बॉक्स में प्लास्टिक का इस्तेमाल हैंडल के रूप में हुआ, लेकिन बाद में इसे बॉक्स के अंदर भी यूज किया जाने लगा। इस तरह पहला मोल्डेड प्लास्टिक बॉक्स बना 1960 में।

इसके बाद से लंच बॉक्स में कुछ और बदलाव हुए। और आज परिणाम आपके पास है प्लास्टिक और स्टील के लंच बॉक्स के रूप में।
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