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World Aids Day 2019: हर एचआईवी पीड़ित को नहीं होता एड्स, जानें दोनों में क्या है अंतर

Sun, 01 Dec 2019 07:03 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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आज विश्व एड्स दिवस है। हर साल एक दिसंबर को मनाए जाने वाले इस खास दिवस का उद्देश्य एचआईवी संक्रमण की वजह से होने वाली जानलेवा बीमारी एड्स के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। अक्सर देखा गया है कि लोग इस बीमारी के लक्षणों को अनदेखा करते हैं फिर इसकी चपेट में आकर जान तक गवां बैठते हैं। 
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HIV AIDS
ज्यादातर लोग एचआईवी और एड्स को एक ही बीमारी मानते हैं, जबकि ऐसा होता नहीं है। ये दोनों बीमारियां अलग-अलग हैं। ये आपस में जुड़े हुए हैं लेकिन दोनों का मतलब एक नहीं है। साथ ही यह भी जानना चाहिए कि एचआईवी के हर मरीज को एड्स हो, यह जरुरी नहीं। आइए, जानते हैं दोनों के बारे में। 
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क्या है एचआईवी?
एचआईवी का मतलब होता है मानव इम्यूनोडिफीसिअन्सी वायरस। यह वायरस मूलत: सेक्स के माध्यम से फैलता है। जब किसी एचआईवी संक्रमित पुरुष या महिला के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाया जाता है, तब बिना सुरक्षा के सेक्स करने पर यह वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसके अलावा शरीर से निकलने वाले फ्लूइड जैसे कि वेजाइना से निकलने वाला फ्लूइड या सिमेन, लार या ब्लड के संपर्क में आने से भी हो सकता है। एचआईवी वायरस की जांच करने पर जब रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो उसे एचआईवी पॉजिटिव कहा जाता है।

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एचआईवी एड्स - फोटो : सोशल मीडिया
एड्स क्या है?
एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम है। यह मूलत: किसी व्यक्ति के इम्यून सिस्टम यानी कि प्रतिरोधक क्षमता का ध्वस्त हो जाना है। किसी एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति को एड्स होने में दो से 10 साल तक का समय लग जाता है। इस स्टेज में व्यक्ति के शरीर की इम्यूनिटी बेहद कम हो जाती है और ऐसे में उसे एक साथ कई तरह के इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। 
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विश्व एड्स दिवस - फोटो : SELF
एचआईवी और एड्स में अंतर
एचआईवी इंफेक्शन का एक्सट्रीम स्टेज है- एड्स। एचआईवी एक ऐसा वायरस होता है, जो शरीर के इम्यून सिस्टम को बेहद कमजोर बना देता है। अगर सही समय पर एचआईवी का पता न चले तो शरीर में इंफेक्शन बढ़ता चला जाता है और फिर ये एड्स बन जाता है। हालांकि शुरुआती स्टेज में ही एचआईवी का पता चल जाए तो दवाओं और सही इलाज से यह नियंत्रित हो सकता है। 
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aids
क्या है एड्स के लक्षण
  • वजन घटना
  • शरीर में लाल चकत्ते होना 
  • रात में पसीना आना
  • गला सूखना 
  • मांसपेशियों में दर्द
  • बार-बार बुखार आना, ठंड लगना
चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी के आरंभिक लक्षणों को पहचानना मुश्किल होता है। अगर आप सावधान रहें और शुरुआत में ही पता चल जाए, तो इसे नियंत्रित किया जा सकता है और लंबे समय तक आप स्वस्थ रह सकते हैं। 
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