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कोरोना: आखिर कैसे बढ़ाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कि वो वायरस को खत्म कर दे?

Mon, 18 May 2020 02:13 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस से पैदा हुई महामारी यानी कोविड-19 का प्रकोप किस दवा से खत्म होगा? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए दुनिया भर के शोधकर्ता मेहनत कर रहे हैं। अभी तक एक ही बात साफ है कि जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है, उन पर कोविड-19 का हमला घातक नहीं होता। अब बाजार इसी बात को भुनाने में लग गया है। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के अनेक उपाय मीडिया, सोशल मीडिया पर सुझाए जा रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। हर महामारी के समय में ऐसी बातें होती रहती हैं। 1918 में जब स्पेनिश फ्लू फैला था तब भी इसी तरह की बातें हुई थीं और आज 2020 में भी ऐसा ही देखने को मिल रहा है। हालांकि इन सौ वर्षों में मेडिकल साइंस के लिहाज से इंसान ने काफी तरक्की कर ली है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हाल में इन दिनों एक अफवाह सोशल मीडिया पर खूब वायरल है। कहा जा रहा है कि ज्यादा से ज्यादा हस्तमैथुन से ब्लड सेल बढ़ते हैं। साथ ही ऐसे फल खाने की सलाह दी जा रही है, जिनमें विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में हो। बहुत से लोग तो प्रो-बायोटिक्स लेने की सलाह भी दे रहे हैं। कोई कह रहा है कि ग्रीन-टी और लाल मिर्च से कोविड-19 के कमजोर किया जा सकता है। 
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
अब जितने प्रोडक्ट हैं उतनी ही बातें हैं 

रिसर्च कहती है कि सुपर फूड बाजार का फैलाया हुआ एक मिथक है। साइंस की रिसर्च में इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिलता कि इनसे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी की इम्युनोलॉजिस्ट अकीको इवासाकी का कहना है कि प्रतिरोधक क्षमता के तीन हिस्से होते हैं-त्वचा, श्वसन मार्ग और म्यूकस झिल्ली। ये तीनों हमारे शरीर में किसी भी संक्रमण को रोकने में मददगार हैं। अगर कोई वायरस इन तीनों अवरोधकों को तोड़कर शरीर में घुस जाता है, तो फिर अंदर की कोशिकाएं तेजी से सतर्कता बढ़ाती हैं और वायरस से लड़ना शुरू कर देती हैं। 

अगर इतने भर से भी काम नहीं चलता है तो फिर एडॉप्टिव इम्यून सिस्टम अपना काम शुरू करता है। इसमें कोशिकाएं, प्रोटीन सेल और एंटीबॉडी शामिल हैं। शरीर के अंदर ये रोग प्रतिरोधक क्षमता उभरने में कुछ दिन या हफ्ता भर लग सकता है। एडॉप्टिव इम्यून सिस्टम कुछ खास तरह के विषाणुओं से ही लड़ सकता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हल्की खांसी, नजला, बुख़ार, सिरदर्द के लक्षण किसी वायरस की वजह से नहीं होते हैं। बल्कि ये हमारे शरीर की उस प्रतिरोधक क्षमता का हिस्सा होते हैं जो हमें जन्म से मिलती हैं। बलगम के जरिए बैक्टीरिया को बाहर निकालने में मदद मिलती है। बुखार, शरीर में वायरस के पनपने से रोकने का माहौल बनाता है। ऐसे में अगर किसी के कहने पर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली चीजों का सेवन कर भी लिया जाए, तो उसका असल में कोई फायदा होने वाला नहीं है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अक्सर लोग मल्टी विटामिन के सप्लीमेंट इस उम्मीद में लेते रहते हैं कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाएगी। रिसर्च कहती हैं कि जो लोग पूरी तरह सेहतमंद हैं उन्हें इसकी जरूरत ही नहीं अतिरिक्त सप्लीमेंट लेने की आदत का शिकार सिर्फ आम इंसान नहीं हैं। पढ़े-लिखे लोग भी इस जाल में फंस जाते हैं। मिसाल के लिए दो बार नोबेल अवॉर्ड विजेता लाइनस पॉलिंग जुकाम से लड़ने के लिए हर रोज 18,000 मिलीग्राम विटामिन सी लेने लगे। ये मात्रा शरीर की जरूरत से 300 गुना ज्यादा थी। विटामिन-सी, नजला जुकाम से लड़ने में बहुत थोड़ी ही मदद कर पाता है। 

इसे लेकर बाजार का बिछाया हुआ मायाजाल ज्यादा है। जानकारों का कहना है कि विकसित देशों में जो लोग संतुलित आहार लेते हैं, उन्हें अपने खाने से ही शरीर की जरूरत के मुताबिक विटामिन-सी मिल जाता है। वहीं विटामिन-सी का ज्यादा सेवन गुर्दे में पथरी की वजह बन सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जानकारों के अनुसार जब तक शरीर में किसी विटामिन की कमी ना हो, तब तक किसी भी तरह का सप्लीमेंट हानिकारक हो सकता है। सिर्फ विटामिन-डी का सप्लीमेंट ही फायदेमंद साबित हो सकता है। अकीका इवासाकी के मुताबिक बहुत सी स्टडी में पाया गया है कि विटामिन-डी की कमी से सांस संबंधी रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। इसकी कमी से ऑटो इम्युन वाली बीमारियां भी हो सकती हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
लोगों में विटामिन-डी की कमी का होना सिर्फ गरीब देशों की समस्या नहीं है, बल्कि पैसे वाले देशों में भी ये एक गंभीर मसला है। एक स्टडी के मुताबिक 2012 तक सारी दुनिया में एक अरब से ज्यादा लोग ऐसे थे जिनमें विटामिन-डी की कमी थी। विटामिन-डी की कमी उन लोगों में ज्यादा होती है जो धूप से दूर घरों में अंदर रहते हैं। 

हस्तमैथुन को लेकर सदियों से कई भ्रांतियां समाज में रही हैं। यहां तक कि वर्षों तक इसे कई बीमारियों की जड़ समझा जाता रहा, लेकिन मॉडर्न रिसर्च इसके स्वास्थ्य संबंधी कई फायदे गिनाते हैं। लेकिन ये दावा सरासर गलत है कि हस्तमैथुन कोविड-19 से बचाने में सक्षम है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इसी तरह एंटी ऑक्सीडेंट खाने की जरूरत नहीं है

शरीर में व्हाइट सेल्स से विषैले ऑक्सीजन पदार्थ निकलते हैं, जो दुधारी तलवार की तरह काम करते हैं। एक तरफ तो ये शरीर में किसी बैक्टीरिया या वायरस को बढ़ने से रोकते हैं, तो दूसरी ओर स्वस्थ कोशिकाओं को खत्म करते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर करते हैं। इसीलिए सभी कोशिकाओं को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए एंटी ऑक्सिडेंट की जरूरत होती है। हमें ये एंटी ऑक्सिडेंट काफी मात्रा में फलों, सब्जियों से मिल जाते हैं। इसके लिए अलग से सप्लीमेंट लेने की जरूरत नहीं है। एंटी ऑक्सिडेंट रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कितने मददगार हैं, इस पर भी अभी रिसर्च जारी है, लेकिन ये रिसर्च अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कुछ बैक्टीरिया ऐसे होते हैं जो शरीर के दोस्त होते हैं। हमारी सेहत के लिए उनकी बहुत जरूरत होती है। कई बार शरीर में इन बैक्टीरिया की कमी हो जाती है, इसीलिए बाजार से प्रोबायोटिक्स के सप्लीमेंट लेने पड़ते हैं। संकट के इस दौर में कुछ वेबसाइट पर दावा किया जा रहा है कि प्रोबायोटिक्स कोविड-19 से लड़ने में मददगार है। ऐसे तमाम दावे झूठ हैं। इस दावे पर अभी तक कोई भी रिसर्च पक्के सबूत पेश नहीं कर पाई है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अब सवाल ये है कि आखिर कोविड-19 से बचा कैसे जाए? इसके लिए फिलहाल तो यही जरूरी है कि जितना हो सके सोशल डिस्टेंसिंग और साफ-सफाई का ध्यान रखिए। संतुलित आहार लीजिए। नियम से व्यायाम कीजिए। किसी वेलनेस एक्सपर्ट के बहकावे में आकर खुद ही अपने डॉक्टर मत बनिए। परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लीजिए। 
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