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बात करने से भी फैल सकता है कोरोना वायरस, शोधकर्ताओं ने कहा- बरतें सावधानी

Mon, 18 May 2020 01:29 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से दुनियाभर के लोग दहशत में हैं। इस खतरनाक वायरस के संक्रमण से बचने के लिए लोग सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना संक्रमित मरीजों के छींकने और खांसने से यह घातक वायरस फैलता है। इसी बीच National Academy of Sciences की एक रिसर्च रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना संक्रमित से केवल बात करने से भी सामने वाले व्यक्ति में कोरोना वायरस फैल सकता है। आइए जानते हैं इस रिसर्च रिपोर्ट के बारे में विस्तार से...
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
दरअसल, यह रिसर्च National Academy of Sciences के द्वारा प्रकाशित जर्नल 'Proceedings of the National Academy of Sciences' में छापा गया है। इस रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि रेस्पिरेटरी सिस्टम से निकलने वाली छोटी-छोटी बूंदों के जरिए कोरोना वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति से निकलने वाली ये बूंदें कुछ फीट की दूरी पर जाकर जमीन में गिर जाती हैं। लेकिन जमीन पर गिरने से पहले ये 8 से 14 मिनट तक हवा में ही रहती हैं, क्योंकि इनका भार बहुत हल्का होता है। ऐसे में संक्रमित व्यक्ति से बात कर रहा अन्य व्यक्ति जब सांस लेता है, तो ऐसी संभावना है कि ये बूंदें सांस में ली गई हवा के जरिए उसके रेस्पिरेटरी सिस्टम तक पहुंच जाए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
बात करने के दौरान 1 सेकेंड में निकलती हैं 2600 बूंदें
वैज्ञानिकों के मुताबिक एक बार छींकने पर लगभग 40,000 बूंदें और एक बार खांसने पर लगभग 3,000 बूंदें निकलती हैं। इसके बाद वैज्ञानिकों ने यह पता लगाना शुरू किया कि बात करते समय कितनी मात्रा में बूंदें बाहर निकलती हैं।  National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney और University of Pennsylvania ने मिलकर इस चीज पर अध्ययन किया, जिसमें पता चला कि बात करने के दौरान हर सेकेंड में 2,600 छोटी-छोटी बूंदें बाहर निकलती हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
अभी अध्ययन की है जरूरत
इन अध्ययनों के आधार पर ये समझा जा सकता है कि कोरोना वायरस कितना खतरनाक है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी ये सारे टेस्ट और रिसर्च लैब के वातावरण में किए गए हैं। बाहरी वातावरण में ये वायरस किस तरह से रिएक्ट करता है, इस बात पर और अधिक अध्ययन करने की जरूरत है। दरअसल, बोलने के बाद जैसे ही बूंदें मुंह से निकलती हैं, वातावरण की गर्मी के कारण ये सूखने लगती हैं। ऐसे में बूंदों में मौजूद पानी तो सूख जाता है, मगर वायरस इतना हल्का होता है कि वो हवा में ही 8 से 14 मिनट तक मौजूद रहता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
कोरोना वायरस बढ़ा रहा है चिंता
WHO और भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय पहले ही ये बता चुका है कोरोना वायरस के लगभग 80% मरीजों में किसी भी तरह के कोई लक्षण नहीं दिखें हैं। ये सभी एसिम्पोमैटिक हैं। वहीं अब लॉकडाउन में छुट देकर ट्रांसपोर्ट, ऑफिस और कई तरह के भीड़-भाड़ वाली जगहें खुलने लगी हैं। ऐसे में सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कैसे पता चलेगा कि सामने वाला व्यक्ति कोरोना से संक्रमित है या नहीं?
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