टाटा समूह की दो शीर्ष कंपनियां टाटा स्टील और टाटा पावर ने झारखंड और ओडिशा में ग्रिड से जुड़ी एक सौर परियोजना शुरू करने के लिए हाथ मिलाया है। टाटा स्टील की ओर से शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा गया कि दोनों कंपनियों ने 41 मेगावाट की सौर परियोजना स्थापित करने के लिए 25 साल के लिए एक बिजली खरीद समझौते (पीपीए) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह रूफटॉप, फ्लोटिंग और ग्राउंड माउंटेड सोलर पैनलों का कॉम्बिनेशन होगा।
इस परियोजना के तहत टाटा पावर, जमशेदपुर और कलिंगनगर में टाटा स्टील के लिए फोटो वोल्टाइक (पीवी) क्षमताएं विकसित करेगी। जमशेदपुर में टाटा स्टील 7.57 मेगावाट पावर क्षमता के रूफटॉप पीवी विकसित करेगा, जबकि फ्लोटिंग और ग्राउंड माउंटेड पीवी की क्षमता क्रमश: 10.80 मेगावाट पावर और 3.6 मेगावाट पावर होगी। सोनारी एयरपोर्ट, जमशेदपुर, कलिंगनगर में लगाए जाने वाले ग्राउंड माउंटेड पीवी 9.12 मेगावाट पावर क्षमता के होंगे।
25 साल होगा जीवनकाल, इतना होगा उत्पादन
बयान में कहा गया कि 41.19 मेगावाट की सौर परियोजना से पहले साल में छह करोड़ दो लाख 80 हजार 95 किलोवाट बिजली उत्पादन होने का अनुमान है। अपने पूरे समयकाल (25 साल) के दौरान कुल बिजली उत्पादन 140 करोड़ 93 लाख 61 हजार 488 किलोवाट होगा। बयान के अनुसार यह परियोजना हर साल 45,210 टन कार्बनडाइऑक्साइड गैस (सीओ2) बचाने में मदद करेगी और पूरे समयकाल के दौरान 10 लाख 57 हजार 21 टन गैस बचाएगी।
जलवायु परिवर्तन के असर को कम करना लक्ष्य
इससे पहले मार्च 2021 में दोनों कंपनियों ने जमशेदपुर में 15 मेगावाट की सौर परियोजना विकसित करने की घोषणा की थी। बयान में कहा गया कि टाटा स्टील और टाटा पावर ने अक्षय ऊर्जा स्रोतों का दोहन करने के लिए लगातार अवसरों की खोज की है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने का सबसे अच्छा तरीका हैं। इसमें कहा गया कि आज की घोषणा दोनों कंपनियों की एक स्थिरता संचालित उद्यम बनने की आम खोज में एक और मील का पत्थर है।