झारखंड की नई सरकार का फ्लोर टेस्ट कल विधानसभा में हो सकता है। मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की ओर से बहुमत साबित करने की संभावनाओं के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस विधायक रांची लौट रहे हैं। जोड़-तोड़ की साजिशों की आशंका के बीच जेएमएम और कांग्रेस के विधायकों को तेलंगाना भेज दिया गया था।
क्या है मामला?
दरअसल, जेएमएम नीत गठबंधन के करीब 40 विधायक दो फरवरी को दो उड़ानों से हैदराबाद पहुंचे थे। आशंका जताई गई थी कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चंपई सोरेन के नेतृत्व वाली नई सरकार के विश्वास मत से पहले विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश कर सकती है। अब विधानसभा में विश्वास मत से एक दिन पहले रविवार को रांची के लिए रवाना हुए और देर रात राज्य की राजधानी पहुंचे। विधायक पिछले तीन दिनों से यहां एक रिजॉर्ट में ठहरे हुए थे।
विधानसभा में 43 विधायकों के समर्थन का दावा
झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन के एक वरिष्ठ नेता ने कहा था कि हमें बहुमत साबित करने के लिए 10 दिन का समय दिया गया था। हम इस अवधि के दौरान कोई जोखिम नहीं ले सकते, क्योंकि भाजपा हमारे विधायकों से संपर्क करने की कोशिश कर सकती है। बता दें कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर से गुरुवार को जारी एक वीडियो में 81 सदस्यीय राज्य विधानसभा में 43 विधायकों का समर्थन दिखाया गया है।
चंपई सोरेन ने ली शपथ
इस बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के विधायक दल के नेता चंपई सोरेन ने शुक्रवार को झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी के आलमगीर आलम और राजद के सत्यानंद भोक्ता ने भी मंत्री के रूप में शपथ ली थी।