आधी रात पौने तीन बजे के करीब धमाके के साथ चार मंजिले इमारत में दूसरी मंजिल तक पानी ही पानी भर गया। सांबा की रेनू बाला और उसकी पांच साल की बेटी समीक्षा ने शनिवार को टेक्निकल एयरपोर्ट पर सकुशल लौटने के बाद अपने अनुभव के बारे में बताया कि वह रोजाना अपने परिवार के साथ झेलम नदी के किनारे घूमने जाया करती थी।
एकदम शांत और खूबसूरत दिखने वाली झेलम नदी को देखकर कभी लगता नहीं था कि इसकी खूबसूरती लोगों की जिंदगी को ग्रहण भी लगा सकता है। रेनू बाला ने बताया कि उनके पति सरकारी मुलाजिम के तौर पर कश्मीर में कार्यरत थे। वह अपने परिवार के साथ शिवपोरा इलाके में रहती थी।
उन्होंने बताया कि चार दिन से लगातार हो रही बारिश के दौरान प्रशासन ने अलर्ट रहने को कहा था और उन्होंने सोचा था कि जल्द ही बारिश बंद हो जाएगी और जलस्तर भी कम हो जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। रेनू बाला की पांच वर्ष की बेटी समीक्षा ने बताया कि वह हर तरफ पानी ही पानी देखकर बहुत ही ज्यादा डर गई थी।
उसे बिल्कुल भी यकीन नहीं था कि वह सही सलामत जम्मू पहुंच पायेगी। रेनू बाला ने कहा कि इतने डरावने मंजर और हालात से बाहर निकलने के लिए उसे और उसके परिवार को काफी वक्त लग जाएगा। कानपुर से आए अनुपम और उनकी पत्नी अंजना की आंखों में घाटी में फैले दर्द भरे मंजर की तस्वीर साफ झलक रही थी।
घाटी में आये पानी के सैलाब में तैरती लाशों को देखकर और छतों पर रेंग रही जिंदगी के लिए प्रार्थना कर आंखों में से आंसू झलक पड़े। अनुपम और अंजना ने बताया कि उन्हें मालूम नहीं कि वह कौन सी जगह में फंसे थे, लेकिन अपने होटल का नाम बताते हुए कहा कि वह आजाद होटल में ठहरे हुए थे। उन्होंने बताया कि वह घाटी में घूमने के लिए आये थे, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।