उसने बताया इस जेल में पाक द्वारा हिरासत में लिए गए सर्वजीत सिंह और कृपाल सिंह के साथ रहा। सर्वजीत को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद उसे जेल में किसी गुप्त स्थान में रखा गया। बाद में एक दिन पता चला कि जेल में बंद दूसरे कैदियों ने सर्वजीत सिंह की बेरहमी से पीट कर हत्या कर दी है। लगभग एक वर्ष बाद कृपाल सिंह की जेल में ही हार्टअटैक से मौत का पता चला।
तिलक राज ने बताया पाकिस्तान में बंद भारतीय कैदियों को बेहतर खाना तक नहीं मिलता है और न ही अन्य सुविधाएं। पाकिस्तान कोर्ट द्वारा 14 वर्ष की सजा सुनाई गई। इसी जेल से दस वर्ष पूर्व रिहा हुए आरएस पुरा के सीमावर्ती गांव के नसीब चंद ने मेरे परिवार को मेरे पाकिस्तान की जेल में बंद होने की जानकारी दी थी। बाद में बड़े भाई यशपाल ने भारत सरकार को इस बारे में बताया था।
अब सजा पूरी होने पर केंद्र सरकार की पहल पर पाकिस्तान की जेल में तिलकराज को भारतीय पासपोर्ट मुहैया करवाया गया। उसका पासपोर्ट भी 21 दिसंबर तक ही वैध है। पासपोर्ट के आधार पर पाकिस्तान पुलिस ने वाघा बॉर्डर पर तिलकराज को भारतीय पुलिस के हवाले किया गया।
तिलक राज ने बताया कि 25 नवंबर को उसने देश की सरजमीं पर फिर से कदम रखा। आंसू छलक पड़े। अमृतसर पहुंचने पर कागजी कार्रवाई के सिलसिले में दो दिन तक पुलिस ने उसे वहीं रोक रखा। 27 को पता चला कि उसके पिता का देहांत हो गया। उसने अफसोस जताया कि काश पिता की मौत एक दिन बाद हुई होती तो वह अंतिम संस्कार में शामिल हो पाता।
पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद उसका बड़ा भाई यशपाल उसे अमृतसर से घर लाया। छह दिसंबर शुक्रवार को पिता का दसवां है। उसकी मां की भी कई वर्ष पहले ही मौत हो चुकी है। पाकिस्तान जाने से पहले शादी की थी, पर वहां पकड़े जाने पर पत्नी भी घर छोड़कर चली गई।
उसके पाकिस्तान में पकड़े जाने के बाद पिता रामचंद द्वारा कानूनी तौर पर बेदखल कर देने पर अब तिलकराज के पास रहने के लिए घर तक नहीं रहा। उसके घर पर अब चचरे भाई का कब्जा है। मीरां साहिब लौटने पर उसे अपने सगे-संबंधियों के यहां रहना पड़ रहा है।