विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच पिछले दो साल से प्रदेश कांग्रेस में आजाद और मीर गुट में सुलग रही चिंगारी से अब सियासी विस्फोट हुआ है। पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद पंद्रह दिन से प्रदेश के विभिन्न जगहों पर जनसभाएं और बैठक कर रहे हैं।
विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच पिछले दो साल से प्रदेश कांग्रेस में आजाद और मीर गुट में सुलग रही चिंगारी से अब सियासी विस्फोट हुआ है। पिछले 15 दिनों से जम्मू में डेरा जमाए गुलाम नबी आजाद के समर्थकों ने मीर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पार्टी के ओहदों से इस्तीफे दे दिए हैं। वहीं आजाद खुद भी मैदान में उतर गए हैं।
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दयालाचक में रैली कर शक्ति प्रदर्शन करेंगे
कई जिलों का दौरा व नेताओं से बैठकें करने के बाद अब आजाद वीरवार को कठुआ जिले के दयालाचक में रैली कर शक्ति प्रदर्शन करेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर और पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री रहे गुलाम नबी आजाद की प्रदेश कांग्रेस के मामलों पर अलग-अलग राय है। काम करने के तौर तरीकों पर भी दोनों में दूर-दूर तक सहमति नहीं बन पाई।
वर्तमान नेतृत्व के खिलाफ बना दिया दबाव
पार्टी आला कमान को भी पूरे मामले की समय-समय पर जानकारी मिलती रही लेकिन मामले पर गंभीरता न दिखाए जाने के चलते आजाद समर्थकों ने अब पार्टी ओहदों से इस्तीफे सीधे पार्टी हाई कमान को भेजकर प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान नेतृत्व के खिलाफ दबाव बना दिया है।
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आजाद को विस चुनाव की कमान सौंपने की मांग
आजाद समर्थक नेता गुलाम नबी आजाद को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर उन्हें विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की कमान सौंपने की मांग कर रहे हैं। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर भी आजाद समर्थकों से किसी प्रकार की नरमी के हक में नहीं दिख रहे हैं। गुलाम अहमद मीर का कहना है कि यह अनुशासनहीनता है, जिसके खिलाफ पार्टी नियमों के तहत कार्रवाई होगी।
ऐसे में आजाद और मीर गुट में विवाद को लेकर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हस्तक्षेप नहीं किया तो आने वाले दिनों में कांग्रेस को जम्मू-कश्मीर में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।