प्रदेश में आतंकवाद और नशा तस्करी बढ़ी चुनौती बन गए हैं। इनका पुलिस थानों पर काफी प्रभाव पढ़ रहा है। इसके चलते नशा तस्करी को लेकर तो एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया, उसी तरह से आतंकवाद संबंधित मामलों की जांच और पुलिस थानों से बोझ कम करने के लिए राज्य जांच एजेंसी बनाई गई है।
इन एफआईआर में आतंकी हमले, बिस्फोटक और हथियार बरामदी, साइबर, ड्रोन, आदि किस्म की घटनाएं शामिल हैं। इन सभी एफआईआर की शुरूआती जांच पुलिस को करनी पड़ती है। जो सही से नहीं हो पा रही। दरअसल, पुलिस के पास मैनपावर की कमी है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के थानों में 30 से 40 फीसदी तक की मैनपावर की कमी है। ऐसे में आतंकी घटनाओं के बढ़ते मामलों के बीच दूसरे मामलों की जांच भी प्रभावित होती है।