जम्मू एंड कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद पर अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि प्रदेश में हो रहे घृणास्पद हमलों के लिए मुफ्ती मोहम्मद सईद जिम्मेदार हैं जो अपनी कुर्सी बचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।
हमारे मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी बचाने के लिए कुछ भी सह सकते हैं। मुख्यमंत्री साफ तौर पर राजोरी, उधमपुर और पूरे प्रदेश में कहीं भी हुए हमलों के लिए जिम्मेदार हैं। उमर अपने दादा शेख अब्दुल्ला की 110वीं जयंती पर यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उमर से जब राजोरी और जम्मू के अन्य क्षेत्रों में मुस्लिम ट्रांसपोर्टरों पर हो रहे हमलों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने इसका जवाब इस तरह से दिया। उन्होंने कहा कि वो पीडीपी के संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद का स्पोर्ट करते हैं और चुनाव का परिणाम आने के बाद हमने हाथ भी आगे बढ़ाया था। लेकिन मुफ्ती तो प्रदेश को आग में झोंक देना चाहते थे।
जम्मू में RSS के लोग हथियार लेकर रैली निकाल रहे
उमर ने कहा कि हमें पहले से ही शंका थी कि बीजेपी और मुख्य रूप से आरएसएस प्रदेश में खतरों को बढ़ा देंगे। नौ महीने बाद हमारी ये शंका सच ही साबित हो गई।
जब कश्मीर में भारी संख्या में लोग गिरफ्तार हो रहे थे, तब जम्मू में आरएसएस के लोग हाथों में हथियार लेकर रैली निकाल रहे थे, तब उन्हें रोकने वाला कोई ना था।
नेशनल कांफ्रेंस के फाउंडर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को मिले शेर-ए-कश्मीर के ताज को मानने से सरकार के इंकार पर उमर ने कहा कि शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ना सिर्फ प्रदेश के बड़े नेता थे बल्कि वो पूरे देश के लिए श्रद्धेय थे।
प्रदेश सरकार से जब एक आरटीआई में पूछा गया कि शेर-ए-कश्मीर जम्मू कश्मीर के कौन हैं तो सरकार ने जवाब में इसके लिए कोई रिकार्ड नहीं होने का जवाब दिया था।
उमर ने कहा कि उनका राजनीति में एक अहम रोल रहा है, जबकि इससे बढ़कर उन्होंने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए बेहद बड़े कदम उठाए थे।
कोई भी शख्स उनके आर्थिक योगदान और राजनीति में अंतर नहीं बैठा सकता है। आज जम्मू कश्मीर में कम से कम गरीबी है और इसके लिए शेख मोहम्मद अब्दुल्ला का बड़ा योगदान है।
नेशनल कांफ्रेंस के फाउंडर के शेर-ए-कश्मीर नाम से कई यूनिवर्सिटी, पुल, कांफ्रेंस हॉल, पुलिस ट्रेनिंग इंस्टीटयूट और कई दूसरी पब्लिक बिल्डिंग और वेल्फेयर स्कीम चल रही हैं।