उल्लेखनीय है कि मोहन भागवत आखिरी बार जम्मू-कश्मीर में 2016 में आए थे। अनुच्छेद-370 व 35-ए की समाप्ति के लिए संघ ने जम्मू-कश्मीर में 1953 में हुए प्रजा परिषद के आंदोलन को पूर्ण समर्थन दिया था। पांच अगस्त 2019 को मोदी सरकार की तरफ से अनुच्छेद-370 व 35-ए को समाप्त किए जाने और जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का संघ ने राष्ट्रीय कार्यकारी कमेटी में समर्थन करते हुए केंद्र सरकार के फैसले की सराहना की थी।