फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गठबंधन से पहले भाजपा-पीडीपी रिश्ते में दरार

विज्ञापन
विज्ञापन
नई सरकार के लिए विधिवत गठबंधन से पहले ही भाजपा और पीडीपी के रिश्ते की डोर चटकती दिख रही है। राज्यसभा में अच्छी अंडरस्टैंडिंग से एक साथ चुनाव लड़ने वाले दोनों दल विधान परिषद चुनाव में एक सीट पर आमने-सामने आ गए हैं।
विज्ञापन


सीटों के तामलेल के तहत भाजपा को पांच प्रत्याशी उतारने थे, लेकिन, ऐन वक्त पर पार्टी की ओर से छठा उम्मीदवार सामने आ गया। नामांकन भरने के अंतिम दिन भाजपा के इस कदम ने पीडीपी को चौंकाया है। पीडीपी अब भी मान रही है कि नामांकन वापसी की आखिरी तिथि से पहले इस विवाद को सुलझा लिया जाएगा।

लेकिन, भाजपा नेताओं का कहना है कि आलाकमान के निर्देश पर छह प्रत्याशी खड़े किए गए हैं। ताजा तनातनी को गठबंधन के लिए चल रही अनौपचारिक वार्ता में पैदा हुए गतिरोध से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
विज्ञापन

वादा था पांच का, खड़े कर दिए छह प्रत्याशी

विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 2 मार्च को चुनाव होना है। तालमेल के तहत पीडीपी को छह और भाजपा को पांच सीटों पर चुनाव लड़ना था। नामांकन के आखिरी दिन भाजपा की ओर से कश्मीर से द्राक्षा अंद्राबी ने भी नामांकन कर दिया। उनका नाम पूर्व में भाजपा द्वारा घोषित उम्मीदवारों की सूची में नहीं थी।

 इस तरह कश्मीर की एक सीट पर भाजपा और पीडीपी में लड़ाई ठन गई है। ग्यारह सीटों में से पांच जम्मू, चार कश्मीर और दो लेह-कारगिल की हैं। गौरतलब है कि पहले पीडीपी ने भाजपा को चेताया था कि वह अपने कोर इश्यूज से एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी। पीडीपी ने यहां तक कहा था कि भाजपा को शर्तें मंजूर नहीं हो तो वह नेशनल कांफ्रेंस से गठबंधन करने को स्वतंत्र है।

इस खींचतान के बाद भाजपा के राम माधव ने सरकार पर शीघ्र फैसले की बात कही और पीडीपी ने भी वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई। लेकिन, विधान परिषद के लिए पीडीपी के सामने में अपना एक प्रत्याशी खड़ा कर भाजपा ने संदेश दे दिया है कि उसे जूनियर पार्टनर की हैसियत मंजूर नहीं है।
विज्ञापन

भाजपा गठबंधन पीडीपी से ही करना चाहती है

राज्यसभा चुनाव में पीडीपी के दो प्रत्याशी जीते थे और भाजपा का एक प्रत्याशी कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद से हार गया था। भाजपा गठबंधन पीडीपी से ही करना चाहती है, लेकिन, वह बी टीम बनकर नहीं रहना चाहती।

अफस्पा की एक साल के अंदर वापसी, पाकिस्तान से वार्ता और बातचीत में हुर्रियत को भी शामिल करने जैसी पीडीपी की शर्तों पर संघ को ऐतराज है। अनुच्छेद 370 पर खामोश रहने का लिखित आश्वासन भी भाजपा पचा नहीं पा रही है। पश्चिमी पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को भाजपा नागरिकता देना चाहती है और पीडीपी इसके खिलाफ है।

विधान परिषद चुनाव में भाजपा की ओर से पांच के बजाए छह उम्मीदवारों पर चुनाव मैदान में खड़ा करने पर पीडीपी ने ऐतराज जताया है। पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता नईम अख्तर का कहना हैं कि चुनाव के लिए भाजपा और पीडीपी में सहमति पांच और छह सीटों पर बनी थी।

पीडीपी की ओर से भाजपा के छठे प्रत्याशी पर आपत्ति जताई जाएगी। नामांकन वापसी में अभी वक्त है। उम्मीद है कि भाजपा का एक प्रत्याशी नाम वापस ले लेगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें