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जम्मू संभाग में बदल रहा बरसात का पैटर्न, दिन घटे लेकिन ज्यादा हो रही बारिश

Thu, 29 Jul 2021 01:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा ओमपाल संब्याल, जम्मू

सार

  • कभी सूखे जैसे हालात, तो कभी फट रहे बादल
  • सांबा, उधमपुर, कटड़ा और कठुआ में इस बार भी कम समय में ज्यादा बरसा पानी
  • साल 2012 के बाद मौसम के रुख में आए उतार-चढ़ाव से वैज्ञानिक भी हैं हैरान
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किश्तवाड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में कभी सूखे जैसे हालात बन रहे हैं तो कभी मूसलाधार बारिश या बादल फटने से बाढ़ के कारण तबाही हो रही है। खासकर जम्मू संभाग के मौसम में हो रहे उतार चढ़ाव ने वैज्ञानिकों को भी चिंता में डाल दिया है। पिछले नौ सालों से मौसम अपने सामान्य क्रम से नहीं चल रहा। बारिश के दिन घट रहे हैं लेकिन बादलों से बरसने वाले पानी का पैमाना बढ़ रहा है। इस साल जुलाई माह में हुई बारिश ने जम्मू संभाग के कई जिलों में कहर बरपाया है।

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हाल के वर्षों में किए गए अध्ययन के अनुसार मानसून सीजन में जम्मू संभाग में औसतन 63 दिन बारिश होती है। लेकिन हैरत की बात है कि अब दिन घटकर 55 से 57 तक सिमट रहे हैं। बरसात की अवधि कम हो रही है, लेकिन बारिश सामान्य से कहीं ज्यादा हो रही है। मौजूदा सीजन में रियासी के कटड़ा, उधमपुर, सांबा एवं कठुआ में सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश हुई है। उधमपुर में बारिश वाले 20 दिनों में रिकॉर्ड 830.3 एमएम पानी बरस चुका है। 

इसी तरह से सांबा जिले में 12 दिन की बारिश में 505 एमएम, कठुआ में 9 दिन की बारिश में 316.6 एमएम और कटड़ा में 19 दिन की बारिश में 544.8 एमएम पानी बरस चुका है। शेरे कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में एग्रोमेट डिवीजन के प्रभारी और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र सिंह के अनुसार जम्मू संभाग के मौसम में आई तब्दीली सामान्य नहीं है। 
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यह जलवायु परिवर्तन भी नहीं है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के लिए तीस वर्ष तक के मौसम का अध्ययन और आंकडे़ जरूरी होते हैं। जम्मू संभाग में वर्ष 2012 के बाद से बारिश के दिनों में कमी और कम दिनों में ज्यादा पानी बरसने का ट्रेंड सामने आ रहा है। वर्ष 2014 के सितंबर में बारिश से जो तबाही मची थी, उसके पीछे भी जलवायु उतार-चढ़ाव ही वजह थी। 

कम्यूलोनिंबस प्रकार के बादल मचाते हैं तबाही
बादलों को हाई, मिड और लो श्रेणी में बांटा गया है। जमीन की सतह से सबसे नजदीक वाले बादल कम्यूलोनिंबस कहलाते हैं। यह बादल उस जगह बनते हैं जहां पहाड़ की सीधी ढलान हो। यह बादल एक ही जगह इकट्ठा होकर जलकणों को एक साथ छोड़कर बाढ़ का सबब बनते हैं। इसी प्रक्रिया को क्लाउड बर्स्ट या बादल फटना कहते हैं। बादलों की जितनी ज्यादा ऊंचाई होगी, बारिश उतनी कम होती है। इसी तरह से सतह के जितने नजदीक हों, यह बादल एकसाथ ज्यादा पानी बरसाकर कहर बरपाते हैं।

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