रामनगर रेलवे जम्मू कश्मीर में कार्यरत कीमैन अरविंद कुमार पाठक को अति विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है। बंगलूरू के सोफिया स्कूल सभागार में हुए 59वें वार्षिक राष्ट्रीय रेल पुरस्कार समारोह में रेल मंत्री डीबी सदानंद गोड़ा ने पुरस्कार दिया।
अरविंद ने अपनी ड्यूटी के प्रति बहादुरी और सतर्कता का परिचय देते हुए 6 अगस्त, 2013 को उधमपुर में मालवा एक्सप्रेस का बड़ा हादसा टाल दिया था। उस दिन अरविंद ने ड्यूटी के दौरान सुबह 6:30 बजे देखा एक टनल बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है और उसका मलबा ट्रैक पर गिर गया है।
उसी दौरान 75 की स्पीड से मालवा एक्सप्रेस तेजी से ट्रैक की ओर आ रही थी। इस पर अरविंद ने सूझबूझ से काम लेते हुए तुरंत डेटोनेटर से ब्लास्ट कर चालक को आपात स्थिति से सचेत किया। जिस पर ड्राइवर ने भी तत्काल ब्रेक लगाकर गाड़ी को रोक दिया।
ट्रेन हादसा टालकर बचाई थी हजारों की जान
हालांकि स्पीड तेज होने से गाड़ी थोड़ी मलबे से टकरा गई, लेकिन कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। अगर ड्राइवर को सूचित नहीं किया जाता तो बड़ा हादसा होने पर बड़ी संख्या में मुसाफिरों की जान चली जाती।
इस उपलब्धि के लिए अरविंद को 20 सितंबर, 2013 को दिल्ली में उत्तर रेलवे ने प्रमुख मुख्य अभियंता अवार्ड से भी नवाजा। इसके अलावा 31 अगस्त, 2013 को पाठक को जनरल मैनेजर सेफ्टी अवार्ड भी दिया गया।
मालवा एक्सप्रेस की घटना को रोकने के लिए उत्तर रेलवे से लोको पायलट ड्राइवर हरभजन सिंह को भी राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है। उत्तर रेलवे से चार कर्मियों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इनमें अरविंद और हरभजन भी शामिल रहे।
राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाला भी उपेक्षा का शिकार
यह विडंबना ही है कि उत्तर रेलवे से राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले कीमैन अरविंद कुमार पाठक को पिछले नौ माह से पद का इंतजार है। हाल ही में बंगलूरू में रेल मंत्री से सम्मानित हुए अरविंद को जनवरी 2014 में पदोन्नति के लिए एक टेस्ट में आई साइट कमजोर होने के कारण मेडिकल अनफिट घोषित किया गया था।
3 जून 2014 को सीएमएस/फिरोजपुर मेडिकल बोर्ड के दोबारा टेस्ट लेने पर अरविंद को सीईई-वन कैटागिरी दी गई, लेकिन उसके बाद भी पाठक को ग्रेड के मुताबिक अब तक पद नहीं दिया गया है।
अरविंद ने बताया कि वह उत्तर रेलवे में अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभाते रहे हैं, लेकिन पिछले नौ माह से उन्हें कोई पद में एडजेस्ट न किए जाने से भारी आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। सीईई-वन कैटागिरी में कामर्शियल या अन्य पद पर एडजेस्ट किया जाता है, लेकिन उनकी अभी तक कहीं भी नियुक्ति नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि उत्तर रेलवे से राष्ट्रीय पुरस्कार पाने की खुशी है, लेकिन अब तक कोई पद न मिलने का मलाल भी है। उन्होंने मांग की कि उन्हें शीघ्र रेलवे में कोई नियुक्ति दी जाए, ताकि वह दोबारा अपनी ड्यूटी का बेहतर ढंग से निर्वाह कर सकें।