बता दें कि बीते दिनों चैंबर के प्रधान अरुण गुप्ता ने कहा था कि सरकार के फैसले वातानुकूलित कमरों में बैठकर लिए जा रहे हैं और लोगाें पर थोपे जा रहे हैं। नई आबकारी नीति से जम्मू संभाग के शराब कारोबारियों को बेरोजगार कर दिया गया। बार, बैंक्वेट हॉल संचालकों, रेत-बजरी का काम करने वालों का धंधा चौपट कर दिया गया है। खनन से जुड़े 60 फीसदी कारोबार पर जम्मू-कश्मीर के बाहर से आए लोगों का कब्जा हो गया है। अब रिलायंस कंपनी के रिटेल स्टोर खोलने का प्रस्ताव लाकर छोटे दुकानदाराें की रोजी रोटी छीनने की तैयारी की जा रही है।
यह भी पढ़ेंः
तड़पते परिजन: किसी ने खोया बेटा तो किसी ने पति, इस साल आतंकी हमलों में शहीद हुए जम्मू-कश्मीर ये लाल
उन्होेंने कहा कि दरबार मूव प्रथा खत्म होने से जम्मू के कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है। बंद के समर्थन में ट्रेडर्स फेडरेशन, बार एसोसिएशन, राजनीतिक पार्टियों में कांग्रेस, इकजुट जम्मू संगठन, जम्मू वेस्ट असेंबली मूवमेंट, उधमपुर के कारोबारियों समेत कई अन्य संगठन आगे आए हैं।