दिवाली पर ध्वनि व वायु प्रदूषण।
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दिवाली पर जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति की निर्धारित दो घंटे की आतिशाबाजी के आदेश की जम्मू में जमकर धज्जियां उड़ीं। शाम को शुरू हुआ आतिशबाजी का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। नतीजतन एक ही रात में आतिशबाजी से प्रदूषण का स्तर दोगुना से अधिक पहुंच गया है। हालांकि पिछले साल की तुलना में प्रदूषण में कमी आई है। इसका कारण ग्रीन आतिशबाजी और पटाखों पर महंगाई को कारण माना जा रहा है।
दिवाली पर बढ़ जाता है कई कई गुना प्रदुषण
जम्मू-कश्मीर राज्य प्रदूषण समिति की ओर से वायु प्रदूषण को जांचने के लिए नरवाल, एमए स्टेडियम और बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रियल क्षेत्र में यंत्र लगाए गए हैं। वैसे तो वाहनों और फैक्टरियों आदि कारणों से प्रदूषण का स्तर सामान्य से ऊपर ही रहता है। लेकिन दिवाली पर यह कई गुणा बढ़ जाता है। मानव शरीर के लिए रेस्पीरेबल सस्पेंडेट पार्टिकुलेट मैटर (आरएसपीएम, पीएम-10) नुकसानदायक होता है। इस श्रेणी वाले प्रदूषित कण नाक और मुंह के रास्ते शरीर में जमा होकर नुकसान पहुंचाते हैं। इससे एलर्जी और सांस संबंधी रोग बढ़ते हैं।
इस साल दिवाली के बाद जम्मू में पीएम-10 का स्तर 210 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रिकार्ड किया गया जो सामान्य में 100 होता है। हालांकि वर्ष 2020 में 229 की तुलना में यह 8.29 फीसदी कम है। 2019 में यह स्तर 144.6 और वर्ष 2018 में 145 रिकार्ड किया गया था। इसी तरह आरएसपीएम 2.5 श्रेणी में भी पिछले साल की तुलना में गिरावट आई है। 2020 में आरएसपीएम 2.5, 58.8 की तुलना में इस साल 36.27 रिकार्ड किया गया जो 38.3 फीसदी कम है। 2019 में यह स्तर 49.8 और 2018 में 57.59 दर्ज किया गया था।
जागरूकता का दिख रहा असर
सामान्य में चौबीस घंटे के भीतर यह स्तर 40 होता है। समिति के क्षेत्रीय निदेशक सतपाल बाखरू के अनुसार पिछले साल की तुलना में प्रदूषण में गिरावट आई है, जो अच्छा संकेत है। समिति के वरिष्ठ वैज्ञानिक व राज्य बोर्ड समीक्षक यशपाल ने बताया कि लोगों में जागरूकता का प्रदूषण के स्तर पर असर दिख रहा है और उम्मीद है कि आगामी समय में इसमें और सुधार होगा।
एसओ2 और एनओ 2 का स्तर बढ़ा
पिछले साल की तुलना में इस साल दिवाली पर सल्फर डायोआक्साइड (एसओ-2) और नाइट्रजोजन डायोआक्साइड (एनओ-2) का स्तर बढ़ा है। वर्ष 2020 में एसओ 2 का स्तर 5.8 (लिमिटचौबीस घंटे 20, माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर) की तुलना में इस साल 6.93 दर्ज किया गया। 2019 में यह स्तर 4.61 और वर्ष 2018 में 5.12 दर्ज किया गया था। यह गैस स्तर का प्रदूषण है, जो थर्मल प्लांट से निकलता है। यहां फिलहाल कोई थर्मल प्लांट नहीं चल रहा है। इसी तरह एनओ 2 का 2020 में 28.9 की तुलना में इस साल 30.2 दर्ज किया गया। 2019 में यह स्तर 24.4 और 2018 में 19.24 रिकार्ड किया गया था।