वरिष्ठ नेता थुपसन छेवांग ने बताया कि बैठक में भाजपा और कांग्रेस समेत तमाम दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें गृह मंत्री के साथ पहले दौर की वार्ता पर चर्चा की गई।
लद्दाख के सियासी दलों ने प्रदेश के लिए विधानसभा और संविधान की छठी अनुसूची की मांग तेज कर दी है। वीरवार को दिल्ली में जम्मू-कश्मीर को लेकर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में प्रस्तावित बैठक को लेकर लद्दाख के सियासी दलों ने भी बैठक कर रणनीति बनाई है। तय किया गया कि केंद्र के समक्ष उक्त दोनों मांगों को प्रमुखता से उठाने के लिए लद्दाख के सांसद जाम्यांग सेरिंग नामग्याल के नेतृत्व में पैनल अगले माह दिल्ली में गृह मंत्री के साथ वार्ता करेगा।
विज्ञापन
वरिष्ठ नेता थुपसन छेवांग ने बताया कि बैठक में भाजपा और कांग्रेस समेत तमाम दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें गृह मंत्री के साथ पहले दौर की वार्ता पर चर्चा की गई। केंद्र ने भरोसा दिलाया था कि जल्द ही लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप व्यवस्था की जाएगी। अब जबकि जम्मू-कश्मीर को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हुई है तो लद्दाख भी अपने मसलों को लेकर मुखर होगा।
लद्दाख को विधानसभा दी जानी चाहिए, ताकि प्रदेश अपने स्तर पर कानून बना सके। प्रदेश की 95 फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति से है। ऐसे में सरकार को स्थानीय रोजगार, संपत्ति अधिकार समेत अन्य मामलों को लेकर लद्दाखियों की शंकाओं को दूर करने के लिए प्रदेश को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना होगा। इन मुद्दों पर गठित किया जा रहा पैनल लेह और कारगिल जिलों के तमाम संगठनों से संपर्क करने के बाद अगले माह गृह मंत्री से मुलाकात करने जाएगा।