विधानसभा में वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने कहा कि सरकार डेलीवेजरों के मुद्दे पर गंभीर है। कोई भी रियासती सरकार एक साथ इतने डेलीवेजरों को समायोजित नहीं कर सकती। उनकी समस्या समाधान के लिए कमेटी बनी है।
समायोजन के लिए नीति बनेगी। साथ ही रोडमैप भी तैयार किया जाएगा। उम्मीद है कि दो-तीन महीने में यह मुद्दा हल हो जाएगा।
शून्यकाल में कांग्रेस के जीएम सरूरी ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि एनवाईसी तथा डेलीवेजरों के मसले पर क्या हो है यह सरकार को स्पष्ट करना चाहिए।
पीएचई विभाग ने ट्यूबवेल तथा रिजरवायर के लिए जमीन लिया था लेकिन लोगों को अब तक नौकरी नहीं मिली है जबकि पिछली सरकार में इसके लिए आदेश जारी हुआ था।
इसको लेकर सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। वे सरकार से जवाब मांग रहे थे। इस पर वित्त मंत्री डा. द्राबू ने कहा कि एनवाईसी तथा एडहाक का मसला आज का नहीं है।
पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कैबिनेट में ऐसे भी फैसले हुए हैं कि वित्त विभाग की प्रत्याशा मेें आदेश जारी कर दिया गया है। ऐसे कर्मचारियों की संख्या लगभग 61000 है।
14 कैटोगरी बनाई गई। एक तो ऐसी भी है कि इम्प्लाइज विदआउट सैलरी। किसी भी सरकार के लिए एक साथ इतने कर्मचारियों को समायोजित कर पाना संभव नहीं है।
वित्त मंत्री के जवाब के बाद विपक्ष हंगामा करने लगा। इसके बाद अली मोहम्मद सागर, कांग्रेस के जीएम सरूरी तथा विकार रसूल वानी, अल्ताफ कल्लू ने सदन से वाकआउट किया।