रियासत के विधानसभा चुनाव में अब सियासी हमले तेज हो गए हैं। नेकां, पीडीपी, कांग्रेस सभी एक दूसरे पर वार करने में लगे हैं। छह साल तक गठबंधन धर्म निभाकर सत्ता चलाने वाले नेकां और कांग्रेस ने एक दूसरे के सिर पर सरकार के और बेहतर तरीके से काम न करने का ठीकरा फोड़ना शुरू कर दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की अगुवाई वाली पीडीपी के निशाने पर मुख्य रूप से नेकां है तो नेकां भी पीडीपी पर वार करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने दे रही है। कश्मीर के अलगाववादी नेता और पीपुल्स फ्रंट के मुखिया सज्जाद लोन के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद नेकां तथा अन्य दल भाजपा पर हमलावर हो गए हैं। कुल मिलाकर प्रथम चरण के मतदान के लिए नाम वापसी के बाद दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई तेज हो गई है।
नेकां तथा कांग्रेस दोनों एक दूसरे पर गठबंधन की सरकार में विकास कार्यों में अड़ंगेबाजी का खुलकर आरोप लगा रहे हैं। नेकां के कार्यकारी मुखिया एवं मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी कई सभाओं में कांग्रेस पर लोगों के हित में काम करने में रोड़ा अटकाने की बात कही है। उसने नया जम्मू कश्मीर विजन पर भी रोड़े अटकाने का आरोप लगाया है।