उप राज्यपाल सिन्हा की अध्यक्षता में प्रशासनिक परिषद ने लैंड यूज बदलने के मामलों का निस्तारण करने के लिए संबंधित जिलों के डीसी को अधिकृत किया गया है। परिषद ने एक अन्य फैसले में जम्मू व पांपोर में मेडिसिटी को भी मंजूरी दे दी है। यहां लोगों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
जम्मू-कश्मीर में अब कृषि भूमि का गैर कृषि कार्यों में इस्तेमाल हो सकेगा। नए नियमों से अब कृषि भूमि के गैर कृषि उद्देश्यों के लिए अनियंत्रित बदलाव पर रोक लग सकेगी। वीरवार को उप राज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में हुई प्रशासनिक परिषद की बैठक में इसकी मंजूरी दे दी गई। परिषद ने एक अन्य फैसले में जम्मू व पांपोर में मेडिसिटी को भी मंजूरी दे दी है। यहां लोगों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
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कृषि भूमि के इस्तेमाल में बदलाव की मंजूरी संबंधी फैसले का उद्देश्य अनाज की पैदावार को बढ़ावा देने के साथ-साथ औद्योगिक और सर्विस सेक्टर को भी बढ़ावा देना है ताकि रोजगार का सृजन भी हो सके। नए नियमों से जम्मू-कश्मीर भूमि प्रयोग के मामले में देश के अन्य अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा हो गया है।
जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन के बाद भूमि राजस्व अधिनियम में हुए बदलावों के बाद नियमों में बदलाव की भी जरूरत थी। इससे केंद्र शासित प्रदेश के लोगों की विकास की आकांक्षाओं को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
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डीसी अधिकृत, बाजार मूल्य की पांच फीसदी फीस निर्धारित
लैंड यूज बदलने के मामलों का निस्तारण करने के लिए संबंधित जिलों के डीसी को अधिकृत किया गया है। डीसी आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर मंजूरी या नामंजूरी का फैसला देंगे। जिला उपायुक्त साढ़े बारह एकड़ भूमि प्रयोग में बदलाव की मंजूरी दे पाएंगे। इसके लिए स्टैंप एक्ट के तहत बाजार मूल्य की पांच फीसदी फीस देनी होगी।
डीसी की तरफ से जारी किए गए आदेश से एक साल के भीतर आवेदक को मंजूर की गई भूमि को गैर कृषि प्रयोग के लिए उपयोग में लाना होगा। हालांकि जिस कार्य के लिए मंजूरी दी गई है, आवेदक वह कार्य ही भूमि पर कर पाएगा।
17 मरला जमीन पर घर या फार्म हाउस बनाने पर छूट
17 मरला भूमि पर आवास या फिर फार्म हाउस बनाने के लिए मंजूरी लेने पर छूट दी गई है। सहायक आयुक्त राजस्व, एसडीएम और संबंधित तहसीलदारों को अपने संबंधित क्षेत्राधिकार में कार्यान्वयन की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई हैं। प्रत्येक कृषि विस्तारक अधिकारी को नियमों का उल्लंघन होने पर इसकी जानकारी राजस्व अधिकारियों को देने के लिए कहा गया है। ऐसा न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।