नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) जम्मू और कश्मीर में एकमात्र क्षेत्रीय पार्टी है जिसे अब समाप्त हो चुकी चुनावी बांड योजना के माध्यम से चुनावी बांड प्राप्त हुए हैं। चुनाव आयोग ने चुनावी बांड योजना के माध्यम से राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त धन पर नई जानकारी जारी की है।
चुनाव आयोग ने प्रतियों को बरकरार रखे बिना सीलबंद लिफाफे में उक्त जानकारी सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री द्वारा भौतिक प्रतियां लौटाए जाने के बाद, चुनाव आयोग ने डेटा को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। आंकड़ों से पता चला है कि नेकां को 29 अप्रैल 2019 को भारती समूह से इन बांडों के माध्यम से 50 लाख रुपये मिले।
चुनावी बांड को लेकर नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि भाजपा को इससे लगभग 6,900 करोड़ रुपये की भारी राशि मिली है। उनकी पार्टी को केवल 50 लाख रुपये मिले है। उमर ने कहा, "मेरे एक मित्र ने हमें पार्टी चलाने के लिए 50 लाख रुपये का बांड दिया। यह 50 लाख रुपये बनाम 6,900 करोड़ रुपये है। इसकी कोई तुलना नहीं है। लेकिन, केवल उन लोगों को पैसे का उपयोग करने की जरूरत है, जिनके पास लोगों का समर्थन नहीं है। 50 लाख रुपये की राशि हमारे लिए पर्याप्त है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर के लोग एनसी के साथ हैं।'
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी को चुनावी बांड के माध्यम से कोई चंदा नहीं मिला है। इसके राज्य सचिव अब्दुल मजीद कोशीन ने अपने पत्र में चुनाव आयोग को सूचित किया है कि योजना शुरू होने के बाद से 20 सितंबर 2023 तक उसे चुनावी बांड के माध्यम से कोई दान नहीं मिला है।
चुनाव आयोग द्वारा आज जारी किए गए नए आंकड़ों में बांड जारी करने की तारीख, फंड के मूल्यवर्ग, बांड की संख्या और जारी करने वाले भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) शाखा को दिखाया गया है। इसमें पार्टियों के बैंक खातों में रसीद और क्रेडिट की तारीखें भी शामिल हैं।
हालांकि, इसमें चुनावी बांड नंबर शामिल नहीं थे, जो दानदाताओं को प्राप्तकर्ताओं से जोड़ते हैं। हालांकि, कुछ पार्टियों ने चुनाव आयोग को सौंपे गए डेटा में अपने दानदाताओं को सूचीबद्ध किया है।