डीसी डॉ पीयूष सिंगला व अन्य अधिकारी कश्मीरी पंडितों को कैंप न छोड़ने के लिए समझाते रहे। यहां 380 परिवार रहते हैं। इनमें से 20 फीसदी लोग जम्मू चले गए हैं। वेसू कैंप पैकेज इम्प्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष सनी रैना ने बताया कि प्रशासन ने उन्हें पूरी सुरक्षा देने का आश्वासन देते हुए जम्मू न जाने की अपील की है। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू का कहना है कि यह 1990 की याद दिलाता है। कहा कि विश्वास बहाली के कदम के तहत पंडितों को रोजगार देना अल्पसंख्यक विरोधी ताकतों को रास नहीं आ रहा।
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दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले के मट्टन में पीएम पैकेज इम्प्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद रैना ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय पर पिछले दिनों हुए हमले के साथ ही कैंप से बाहर रह रहे 250 लोग जम्मू चले गए। श्रीनगर में दो शिक्षकों की हत्या के बाद मुस्लिम समुदाय के साथी कर्मचारियों ने उन्हें कैंप तक सुरक्षित पहुंचाया।
पीएम पैकेज के तहत नियुक्त 4284 कर्मचारियों के संगठन ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि घाटी में ड्यूटी कर रहे कश्मीरी पंडितों में इस माहौल से डर है। यह स्थिति 1990 की याद दिलाती है। कैंप में रहने वाले तो सुरक्षित हैं, लेकिन कैंप के बाहर भी कई लोग रहते हैं जिन्हें नौकरी पर आना होता है। सभी को सुरक्षा दे पाना संभव नहीं है। ऐसे में स्थिति सामान्य होने तक इन कर्मचारियों को ड्यूटी से विरत रहने की अनुमति दी जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सरकार के कश्मीरी पंडितों को नौकरी में दस दिन की छूट देने के फैसले पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से पिक एंड चूज एप्रोच नहीं होनी चाहिए। अगर इन हमलों के बाद कश्मीरी पंडित समुदाय से संबंधित कर्मचारियों को 10 दिन की छुट्टी दी गई है तो ऐसा फैसला सिख समुदाय के लोगों के लिए क्यों नहीं। हमले में कश्मीरी पंडित के साथ ही सिख समुदाय की महिला को भी मारा गया तो फि र यह भेदभाव क्यों। इसलिए मैं सरकार से अपील करता हूं कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए ताकि दोबारा 90 के दशक की तरह पलायन न हो।