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जम्मू-कश्मीर : प्रिंसिपल सुपिंदर कौर का शव घर पहुंचा तो बेटी जसलीन टूट गई

Fri, 08 Oct 2021 04:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर

सार

श्रीनगर के अलूचीबाग स्थित घर में मातम, छोटा भाई घटना से अंजान। पड़ोसियों को यकीन नहीं हो रहा था कि इतनी नेक शख्सियत को आखिर कोई मार सकता है। 
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विलाप करते परिजन... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रेंकिपोरा बडगाम की रहने वाली प्रिंसिपल सुपिंदर कौर की हत्या की खबर के बाद अलूचीबाग स्थित आवास पर लोगों का तांता लग गया। सभी घटना की निंदा कर रहे थे। सुपिंदर के दो छोटे-छोटे बच्चे जसजीत सिंह (9) और जसलीन कौर (12) को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है। घर में इतने लोग क्यों आ रहे हैं।  

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जैसे ही सुपिंदर का शव घर पहुंचा वो मकान के बरामदे में खड़ी बेटी जसलीन एक दम से टूट गई। उसका रो रोकर बुरा हाल था। मां को सफेद कफन में देख उसके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, लेकिन इस बीच उसका छोटा भाई जसजीत यह नहीं समझ पा रहा था, हुआ क्या है। आखिर उसकी बहन क्यों रो रही है। यह मंजर देख सबका दिल पसीज गया।

सुपिंदर के पति आरपी सिंह जम्मू कश्मीर बैंक में अधिकारी हैं। घर में सांत्वना जताने पहुंचे लोग सवाल कर रहे थे कि आखिर सुपिंदर को आतंकियों ने निशाना क्यों बनाया। पड़ोसियों को यकीन नहीं हो रहा था कि इतनी नेक शख्सियत को आखिर कोई मार सकता है। 
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घर पहुंचे सिख समुदाय के लोगों का कहना था कि आतंकवाद के 30 साल भी सिख यहां के लोगों के साथ हमेशा शान से खड़े रहे और इस घड़ी में यहां के लोग हमारे साथ नहीं खड़े होंगे तो हमारा रहना यहां मुश्किल हो जाएगा। इस घटना के बाद सिख समुदाय में काफी खौफ  पैदा हुआ है। उनका यह भी कहना था कि बिना किसी दोष के सुपिंदर को निशाना बनाया गया। हम चाहते हैं कि हमारा भाईचारा वैसे ही कायम रहे जैसा पहले था। 

मेयर ने कहा-पुलिस महकमे में भी असहिष्णुता
एसएमसी के मेयर जुनैद अजीम मट्टू ने कहा, यह घटना दरिंदगी की मिसाल है और इससे घिनौनी क्या घटना हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर एक ऐसी निहत्थी महिला को मारा जाए जो हमारे बच्चों को तालीम देती हो तो उन लोगों को मिलिटेंट नहीं टेररिस्ट कहा जाना चाहिए। जुनैद ने कहा, एमएल बिंदरू, गोलगप्पे वाले वीरेंदर पासवान, दीपक चंद और सुपिंदर ने किसी का क्या बिगाड़ा था। आतंकी यहां अमन नहीं देखना चाहते, भाईचारे में फूट डालना चाहते हैं, लेकिन मैं उन्हें यह कहना चाहता हूं कि कश्मीर मुसलमान, सिख, ईसाई, हिन्दू सबका है और आगे भी रहेगा। पुलिस की चूक को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मट्टू ने कहा, इसका जवाब देने से सब डरेंगे, क्योंकि पुलिस महकमे में भी असहिष्णुता (इनटॉलेरेंस) हो गई है।  

हमला सुरक्षा में चूक, डीजीपी से सुरक्षा की समीक्षा करे को कहा : सोफी
  भाजपा के सोफी यूसुफ ने कहा कि यह पाकिस्तान की बौखलाहट हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक उनके पास जानकारी है इस घटना में कहीं न कहीं सुरक्षा में चूक भी है। सोफी ने कहा इस संबंध में मैंने डीजीपी से भी बात की है और सुरक्षा की समीक्षा करने को कहा है। आतंकियों को कड़े शब्दों में उन्होंने कहा कि उनकी अब उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह टारगेट किलिंग थी, उनके आइडेंटिटी कार्ड चेक किये गए। हमारी इस बहन का भी कार्ड चेक किया गया। यह वो ताकतें हैं जिनको यहां अमन पसंद नहीं है।    

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एक यतीम मुस्लिम लड़की की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाती थीं सुपिंदर

श्रीनगर के ईदगाह में आतंकी हमले का शिकार बनी प्रिंसिपल सुपिंदर कौर के पड़ोसी शौकत डार को यकीन ही नहीं हो रहा था कि वह अब इस दुनिया में नहीं हैं। रोते हुए उन्होंने कहा कि वह बहुत ही नेक महिला थीं। पिछले कुछ वर्षों से वह एक मुस्लिम लड़की की पढ़ाई का पूरा खर्च उठा रही थीं। 

  शौकत अहमद डार ने विशेष बातचीत में कहा कि हमारे परिवार के अलावा उनके दुख और पीड़ा साझा करने के लिए उनके पास कोई और नहीं था। सुपिंदर हमारे घर को अपने मायके के रूप में मानती थीं। करण नगर इलाके में लैब टेक्निशन का काम करने वाले डार बताते हैं कि हर दिन जब भी वह स्कूल के लिए निकलती थीं तो वह हमें बताने के लिए खिड़की पर दस्तक देती थीं कि वह जा रही है। डार ने बताया कि वे और सुपिंदर के पति आरपी सिंह नर्सरी से एक साथ ही पढ़े हैं, और आज भी रोज सुबह एक साथ वॉक पर जाते हैं। वीरवार को भी सुबह उन्होंने मुझे फोन किया था।

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले सुपिंदर ने उसका पहचान पत्र पहने देखा था जिसमें मैनेजर के रूप में मेरी पोस्ट लिखी गई थी। इस पर सभी पड़ोसियों के बीच उन्होंने मिठाई बांटी। सुपिंदर से मेरा खून का रिश्ता नही था परंतु वह हमारे परिवार का हिस्सा थीं। 



डार ने कहा कि सुपिंदर बतौर प्रिंसिपल जितना वेतन पाती थीं उसका आधा हिस्सा सामाजिक कार्यों पर खर्च करती थीं। छानापोरा हायर सेकेंडरी स्कूल की एक छात्रा की फीस और ड्रेस का खर्चा उठाती थीं। यह लड़की यतीम थी और पहले अपनी मौसी के पास रहती थी। लेकिन पिछले साल मौसी की शादी के बाद वह परेशान थी। इसका किसी तरह सुपिंदर को पता लगा तो उन्होंने मुझे कहा था कि इस लड़की तो तुम अपने घर में रखो और 20 हज़ार रुपये मैं उसके खर्च के लिए दूंगी। सुपिंदर का छानापोरा हायर सेकेंडरी स्कूल से तबादला हो गया लेकिन लड़की का खर्च उठतीं थीं। 

हर पड़ोसी से थे अच्छे संबंध
डार ने रोते हुए बताया कि कौर के हर पड़ोसी के साथ अच्छे संबंध थे। कोरोना काल में डार का पूरा परिवार संक्रमित हो गया था। ऐसे समय में केवल सुपिंदर ही हालचाल पूछती थी।एक दिन उसने मुझे कहा कि दरवाज़ा खोलो और एक पैकेट अंदर फेंका, जिसमें करीब 10 हज़ार रुपए थे। मेरी बहन ने मदद की और कोई नहीं आया। 
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